मैरीकॉम जैसी बनना चाहती हूं: पाकिस्तान को वुमन्स बॉक्सिंग में पहला मेडल दिलाने वाली फातिमा जहरा बोलीं- उनकी कहानी ने जिंदगी बदल दी
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कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली पाकिस्तानी बॉक्सर फातिमा जहरा और भारत की मैरी कॉम।
स्पोर्ट्स डेस्क. पाकिस्तान की 22 साल की बॉक्सर फातिमा जहरा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। वे वुमन्स बॉक्सिंग में पाकिस्तान को पहला मेडल दिलाने वाली एथलीट बनी हैं। 60 Kg कैटेगरी में ब्रॉन्ज जीतने के बाद फातिमा ने कहा कि उनकी इंस्पिरेशन भारत की मैरी कॉम हैं। उन्होंने बताया कि मैरी कॉम की जिंदगी पर बनी फिल्म देखकर ही उन्हें बॉक्सिंग की प्रेरणा मिली। वे मैरी कॉम की तरह बनना चाहती हैं।
मैरी कॉम की फिल्म देखकर बॉक्सिंग शुरू की
फातिमा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि बचपन में उनके देश में महिला बॉक्सर्स के ज्यादा रोल मॉडल नहीं थे। ऐसे में उन्होंने भारत की मैरी कॉम को अपना आदर्श बनाया।

फातिमा ने कहा- मैं भारत की मैरी कॉम से इंस्पायर हूं। जब मैंने बॉक्सिंग शुरू की, तब मैं उनकी बायोपिक बार-बार देखती थी। उसी से मुझे ट्रेनिंग करने का हौसला मिलता था। मैं भी एक दिन उनके जैसी बनना चाहती हूं। उम्मीद है कि कभी उनसे मुलाकात भी होगी।
मैरी कॉम की कहानी से हौसला मिला
मैरी कॉम मणिपुर के एक गरीब किसान परिवार से हैं। उन्होंने आर्थिक तंगी, समाज की सोच और सीमित संसाधनों के बावजूद हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए 6 बार वर्ल्ड चैंपियन बनीं। उनके नाम ओलंपिक ब्रॉन्ज, एशियन गेम्स गोल्ड, कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड और पांच एशियन चैंपियनशिप खिताब भी हैं।
परिवार था खिलाफ, फिर भी नहीं छोड़ी बॉक्सिंग
फातिमा का सफर भी आसान नहीं रहा। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका परिवार बॉक्सिंग के खिलाफ था। उन्होंने कहा- मेरा बैकग्राउंड बहुत मजबूत नहीं था। मेरे पहले कोच ने मुझे सब कुछ सिखाया। परिवार मुझे ट्रेनिंग के लिए जाने नहीं देता था, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और बॉक्सिंग जारी रखी। मैं भी कभी एक आम लड़की थी। मैंने बॉक्सिंग चुनी, मेहनत की और आज यहां तक पहुंची।

