सागर की यामिनी मौर्य ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रचा इतिहास : किसान परिवार की बेटी ने 57 किलो वर्ग में जूडो में जीता रजत पदक, संघर्ष और जज्बे की बनी मिसाल
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सागर की यामिनी मौर्य ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 मे जीता सिल्वर मेडल
सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले की होनहार जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 57 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। साधारण किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची यामिनी ने अपनी उपलब्धि से न केवल सागर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।
57 किलोग्राम भार वर्ग में जीता सिल्वर मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स के 57 किलोग्राम भार वर्ग में यामिनी ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई। खिताबी मुकाबले में उनका सामना इंग्लैंड की खिलाड़ी से हुआ। स्वर्ण पदक से भले ही वे मामूली अंतर से चूक गईं, लेकिन रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया।
सालों का संघर्ष और अटूट आत्मविश्वास
यामिनी की सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, कठिन परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास है। किसान परिवार से आने वाली यामिनी ने अपनी शुरुआती शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने जूडो को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार अभ्यास जारी रखा।
अभ्यास के दौरान टूटा पैर
उनके संघर्ष का सबसे कठिन दौर तब आया, जब अभ्यास के दौरान उनका पैर टूट गया। गंभीर चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक खेल से दूर रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इलाज और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने दमदार वापसी की और पहले राष्ट्रीय, फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
किसान परिवार से नाता
यामिनी के पिता हरिओम मौर्य किसान होने के साथ एलआईसी एजेंट भी हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। चार भाई-बहनों वाले परिवार में यामिनी दूसरे नंबर की संतान हैं। उनके अन्य भाई-बहन भी खेल गतिविधियों से जुड़े हैं। परिवार ने हर कठिन परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूरे मध्यप्रदेश में खुशी की लहर
कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने के बाद सागर सहित पूरे मध्यप्रदेश में खुशी की लहर है। खेल प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने यामिनी को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा
यामिनी मौर्य की यह उपलब्धि उन सभी युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि मजबूत इरादे, निरंतर मेहनत और परिवार का साथ हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

सीएम मोहन यादव ने ट्वीट कर दी बधाई
वहीं सीएम डॉ मोहन यादव ने भी ट्वीट करके बधाई दी और लिखा कि सागर की बिटिया यामिनी मौर्य ने अपने अनुशासन एवं अथक परिश्रम से यह सिद्ध कर दिया है कि मध्यप्रदेश की बेटियां भी अपना परचम लहराने में पीछे नहीं हैं।
भारत के लिए रचा इतिहास
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में महिलाओं की 57 किग्रा जूडो स्पर्धा में रजत पदक जीतने के साथ ही वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भारत के लिए इतिहास रचने वाली यामिनी की उपलब्धियां प्रदेश के प्रत्येक युवा, विशेषकर हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा है।
इस गौरवशाली उपलब्धि के पीछे यामिनी के कोच श्री दीपक कुमार जी का समर्पण भी उतना ही प्रेरणादायी है। आपको इस सफलता तक पहुंचाने वाले कोच एवं प्रशिक्षकों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
हरिओम मौर्य(यामिनी के पिता)
मिथलेश मौर्य(यामिनी की माँ)

