रुमेश CWG गोल्ड जीतने वाले पहले श्रीलंकन जैवलिन थ्रोअर: नीरज चोपड़ा को हराया, एशिया का दूसरा बेस्ट थ्रोअर 92.62 मीटर कर चुके; जानिए स्टोरी
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स्पोर्ट्स डेस्क. ग्लास्गो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन श्रीलंका के जैवलिन थ्रोअर रुमेश पथिरागे थरंगा (Rumesh Pathirage Tharanga) ने गोल्ड जीता है। खास बात यह रही कि वे कुछ समय पहले क्रिकेट खेला करते थे और फास्ट बॉलर थे। उन्होंने क्रिकेट छोड़कर जैवलिन थामा और अब ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले भारतीय थ्रोअर नीरज चोपड़ा को हराया है। नीरज ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया है।
नीरज ने 85.83 मीटर बेस्ट थ्रो के साथ सिल्वर जीता। जबकि भारतीय यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का बेस्ट थ्रो करते हुए ब्रॉन्ज अपने नाम किया। श्रीलंकाई रुमेश ने 89.75 मीटर का बेस्ट थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीता है। वे गोल्ड जीतने वाले श्रीलंका के पहले जैवलिन थ्रोअर बन गए हैं।
इसी साल किया 92.62 मीटर का बेस्ट थ्रो
रुमेश का कॅरियर बेस्ट थ्रो 92.62 मीटर है, जो उन्होंने इसी साल रोम डायमंड लीग 2026 में किया था। इस तरह वे एशिया का दूसरा बेस्ट थ्रो करने वाले एथलीट बने। उनसे आगे पाकिस्तान के अरशद नदीम हैं, जिन्होंने पेरिस ओलंपिक 2024 में 92.97 मीटर थ्रो किया था।
जबकि नीरज का कॅरियर बेस्ट थ्रो 90.23 मीटर है। यह उन्होंने दोहा डायमंड लीग 2026 में किया था। आइए जानते हैं रुमेश की दिलचस्प स्टोरी कि कैसे वे क्रिकेट छोड़कर जैवलिन थ्रोअर बने...

श्रीलंका के लिए अंडर-18 क्रिकेट खेल चुके
दरअसल, 23 साल के रुमेश ने श्रीलंका के लिए अंडर-18 क्रिकेट खेला है। वे उस उम्र में लगातार 130 kph की रफ्तार से बॉलिंग करने की काबिलियत रखते हैं। एक बार उन्होंने 134 kph की रफ्तार को भी टच किया था।
तब वे इस रफ्तार से बॉलिंग करने वाले अपनी टीम में ईशान मलिंगा के बाद दूसरे बॉलर थे। ईशान इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं। IPL में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए भी खेलते हैं।
कोच टोनी ने जैवलिन गेम से जोड़ा
इसी बीच एथलेटिक्स कोच टोनी प्रसन्ना ने रुमेश में एक अलग प्रतिभा देखी। उन्होंने रुमेश को क्रिकेट छोड़कर जैवलिन खेलने की सलाह दी। एक इंटरव्यू में रुमेश ने कहा था- कोच टोनी ने ही मुझे जैवलिन के बारे में बताया था। उन्होंने मुझसे कहा था कि यदि मैं जैवलिन के बेसिक में मास्टर हो जाउं और उसको सही से फॉलो करूं तो एक दिन जरूर सफल हो जाऊंगा।
रुमेश ने कहा- टोनी मेरे लिए कोच से कहीं बढ़कर हैं। उन्होंने मुझे सिर्फ खेल नहीं सिखाया बल्कि जीवन के बारे में बहुत कुछ सिखाया है। पिछला सीजन मेरे लिए शानदार रहा था। मैं अपनी पहली ही वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 7वें नंबर पर रहा था। इस सीजन मैं अपने खेल में लगातार सुधार कर कर रहा हूं।
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IOC भी रुमेश की हेल्प कर रहा
रुमेश का जो खेल दिन-ब-दिन बेहतर होता जा रहा है, उसमें इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) का भी काफी योगदान है। रुमेश को IOC से स्कॉलरशिप मिलती है। अपने बेहतर खेल के दम पर रुमेश को IOC ओलंपिक सॉलिडेरिटी स्कॉलरशिप के लिए सिलेक्ट किया गया था।
इसके तहत एथलीट को हर महीने स्कॉलरशिप मिलती है, जिससे वे अपने खेल को बेहतर कर सकें। साथ ही अपनी ट्रेनिंग, इक्विपमेंट, ट्रेवल और ओलंपिक क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट्स का खर्च उठा सकें। सिडनी ओलंपिक 2000 के बाद से अब तक 12000 से अधिक एथलीट्स को यह स्कॉलरशिप मिल चुकी है।

