ODI ट्राई सीरीज ज्यादा होनी चाहिए: शुभमन गिल बोले- 50 के बजाय 40 ओवर करने की जरूरत नहीं; ECB चीफ बोले- आइडिया अच्छा है
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अगस्त 2026 तक शुभमन गिल ने भारत की ODI टीम की 12 मैचों में कप्तानी की है।
स्पोर्ट्स डेस्क. भारतीय कप्तान शुभमन गिल चाहते हैं कि वनडे क्रिकेट में एक बार फिर ट्राई सीरीज का दौर लौटे। गिल के इस सुझाव को इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के चीफ रिचर्ड गूल्ड का भी सपोर्ट मिला है। गूल्ड ने कहा है कि आने वाले समय में ट्राई सीरीज के लिए जगह बनाई जा सकती है। खास बात यह है कि 2023 से 2027 तक के ICC फ्यूचर टूर प्रोग्राम में पहले से ही कुछ मल्टी-टीम टूर्नामेंट रखे गए हैं।
गिल ने ODI में ट्राई सीरीज की बात क्यों उठाई?
शुभमन गिल का मानना है कि वनडे क्रिकेट को मजेदार बनाने के लिए 50 ओवर के फॉर्मेट को बदलने की जरूरत नहीं है। उन्होंने 50 की बजाय 40 ओवर का मैच करने के प्लान का सपोर्ट नहीं किया। गिल के मुताबिक, 50 ओवर का वर्ल्ड कप क्रिकेट का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है और इसकी पहचान को बनाए रखना चाहिए।
गिल ने बताया कि जब वह छोटे थे तब इंडिया, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच होने वाली ट्राई-सीरीज देखना उन्हें काफी पसंद था। उनके मुताबिक, ऐसी सीरीज में हर बार एक ही टीम के खिलाफ खेलने के बजाय अलग-अलग टीमों से मुकाबला होता है, जिससे खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों का मजा बढ़ जाता है।
गिल ने कहा कि पहले भारत, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी टीमों के बीच कई ट्राई-सीरीज हुआ करती थीं और उन्हें देखना काफी मजेदार होता था। उनका मानना है कि अगर आज फिर ऐसी सीरीज शुरू होती हैं तो खिलाड़ियों को भी इन्हें खेलने में मजा आएगा।

बाइलेटरल सीरीज से अलग होगा रोमांच
गिल चाहते हैं कि वनडे क्रिकेट में सिर्फ दो टीमों के बीच होने वाली बाइलेटरल सीरीज पर निर्भर रहने के बजाय ट्राई-सीरीज या चार टीम वाली सीरीज भी कराई जाए। उनका मानना है कि इससे क्रिकेट में थोड़ा बदलाव और नया रोमांच आएगा। एक टीम के खिलाफ लगातार मैच खेलने के बजाय खिलाड़ियों को अलग-अलग टीमों के सामने अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी। इससे मैचों में भी ज्यादा दिलचस्पी बनी रह सकती है।
ECB चीफ रिचर्ड गूल्ड ने भी दिया समर्थन
गिल की इस बात पर ECB चीफ रिचर्ड गूल्ड ने भी जवाब दिया है। उन्होंने माना कि इंटरनेशनल क्रिकेट में ट्राई-सीरीज के लिए अभी भी जगह है। हालांकि, गूल्ड ने यह भी साफ किया कि इंग्लैंड का शेड्यूल पहले से काफी व्यस्त है। ऐसे में किसी नई सीरीज को जोड़ने के लिए कैलेंडर को ध्यान में रखना होगा। टेस्ट, वनडे और टी20 के अलावा खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी क्रिकेट भी खेलना पड़ता है। फिर भी गूल्ड की बात से इतना साफ है कि ECB त्रिकोणीय सीरीज के विचार के खिलाफ नहीं है।
ICC के शेड्यूल में पहले से ट्राई-सीरीज
ट्राई-सीरीज की वापसी सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं है। ICC के 2023 से 2027 तक के फ्यूचर टूर प्रोग्राम में कई मल्टी-टीम टूर्नामेंट पहले से शामिल हैं। फरवरी 2025 में पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के साथ ट्राई सीरीज खेली थी। यह टूर्नामेंट चैंपियंस ट्रॉफी 2025 से पहले हुआ था। अगस्त-सितंबर 2026 में नामीबिया के विंडहोक में एक टी20 ट्राई सीरीज भी होनी है।
इसमें नामीबिया के अलावा साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे की टीमें खेलेंगी। ये तीनों देश 2027 वनडे वर्ल्ड कप के सह-मेजबान हैं। इसके अलावा पाकिस्तान अक्टूबर 2026 में एक और ट्राई-सीरीज की मेजबानी करेगा। इसमें दो दूसरी टीमें हिस्सा लेंगी। यानी यह फॉर्मेट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बस पहले के मुकाबले अब ऐसी सीरीज कम देखने को मिलती हैं।
ODI के लिए क्यों फायदेमंद होगी ट्राई-सीरीज
ट्राई-सीरीज की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें तीन टीमें एक ही टूर्नामेंट में खेलती हैं। ऐसे में हर मैच में कुछ नया देखने को मिलता है। दो टीमों की बाइलेटरल सीरीज में कई बार लगातार एक ही मुकाबला देखने को मिलता है। लेकिन ट्राई-सीरीज में टीमों को अलग-अलग विरोधियों के खिलाफ तैयारी करनी पड़ती है। एक मैच में जो रणनीति काम करती है, जरूरी नहीं कि अगले मैच में भी वही काम करे। यही चीज खिलाड़ियों के लिए चुनौती बढ़ाती है और दर्शकों के लिए मुकाबलों को ज्यादा दिलचस्प बनाती है।
सबसे बड़ी परेशानी है व्यस्त शेड्यूल
हालांकि, ट्राई-सीरीज को बड़े स्तर पर वापस लाना इतना आसान नहीं होगा। क्रिकेट कैलेंडर पहले ही काफी व्यस्त दिख रहा है। खिलाड़ियों को इंटरनेशनल क्रिकेट के साथ-साथ फ्रेंचाइजी लीग भी खेलनी पड़ती हैं।
ऐसे में नई सीरीज के लिए जगह बनाना क्रिकेट बोर्ड के लिए बड़ी चुनौती होगी। साथ ही खिलाड़ियों के आराम, फिटनेस और वर्कलोड का भी ध्यान रखना पड़ेगा। अगर बोर्ड सही तरीके से शेड्यूल तैयार करते हैं, तो बिना 50 ओवर के फॉर्मेट में कोई बदलाव किए वनडे क्रिकेट में फिर से रोमांच लाया जा सकता है।

