क्या टेस्ट मैच के बीच में रेड से पिंक बॉल बदली जाएगी: कन्फ्यूजन को MCC हेड ने क्लियर किया, कहा- पूरा मैच ही पिंक बॉल से होगा; जानिए नियम
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पहला पिंक बॉल टेस्ट ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था। यह मैच 27 नवंबर 2015 से एडिलेड में हुआ था।
स्पोर्ट्स डेस्क. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। इसमें सबसे खास नियम डे टेस्ट में पिंक बॉल के इस्तेमाल का है। यह रूल सिर्फ इसलिए लाया है ताकि खराब रोशनी या किसी वजह से दिन का खेल बाधित होता है तो शाम को थोड़ी ज्यादा देर तक मैच चलाकर पूरा कराया जा सके।
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अब इस नियम में सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यह है कि क्या टेस्ट मैच के बीच में ही रेड बॉल को बदलकर पिंक से खेलना शुरू किया जाएगा या नहीं। ऐसे में मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के हेड फ्रेजर स्टीवर्ट (Fraser Stewart) ने इस नियम को क्लियर किया है।
MCC हेड स्टीवर्ट ने नियम समझाया
स्टीवर्ट ने कहा- सबसे पहली बात तो यह क्लियर कर दें कि यह ICC की प्लेइंग कंडीशन (खेल का नियम) है ना कि कोई कानून।
उन्होंने कहा- मेरा मानना है कि किसी बाइलेटलर सीरीज में दोनों टीम के बीच एक समझौता रहेगा। दोनों टीमें पहले ही तय करेंगी कि सीरीज के कुछ टेस्ट उन्हें पिंक बॉल से खेलने हैं या नहीं।
MCC हेड ने कहा- कुछ लोगों का मानना है कि मैच की शुरुआत तो रेड बॉल से होगी, लेकिन जब थोड़ा अंधेरा हो जाएगा या खराब रोशनी होगी तब पिंक बॉल का इस्तेमाल किया जाएगा। जबकि मैं यह समझता हूं कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने वाला।

आखिर क्या है पिंक बॉल का नया रूल
- यदि दोनों टीम को लगे कि कोई टेस्ट खराब रोशनी के चलते बाधित हो सकता है, तो दोनों टीम के कप्तान की सहमति से यह मैच पिंक बॉल से खेला जा सकता है।
- यहां ध्यान देना होगा कि पिंक बॉल के इस्तेमाल पर टेस्ट मैच शुरू होने से पहले ही सहमति बननी चाहिए। एक बार ऐसा हो गया तो फिर पूरे मैच में यह सहमति लागू रहेगी।
- टेस्ट शुरू होने के बाद इस सहमति में कोई बदलाव नहीं होगा। एक बार मैच शुरू हो गया तो फिर रेड बॉल को पिंक बॉल से नहीं बदला जा सकेगा।
- टेस्ट मैच के दौरान दिन का आखिरी विकेट गिरने का मतलब खेल खत्म होना नहीं माना जाएगा।
- यदि दिन के आखिरी ओवर में कोई विकेट गिरता है और ओवर भी पूरा नहीं हुआ है, तो इसका मतलब खेल खत्म (मौसम और स्थिति ठीक हो तो) नहीं माना जाएगा।
- यह बदलाव समय बचाने के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि इससे फील्डिंग टीम को फायदा होगा। साथ ही मैच में रोमांच भी बढ़ेगा।
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