वर्ल्ड कप कोई रिहर्सल नहीं है: मेन्स-वुमन्स टीम के बाहर होने पर श्रीजेश ने हॉकी फेडरेशन से पूछा- खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी कौन लेगा?
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भारतीय मेन्स हॉकी टीम ने सिर्फ एक बार वर्ल्ड कप जीता है। 1975 में कुआलालंपुर में खेले गए फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराकर टाइटल जीता था। (फोटो सोर्स -@HockeyIndia)
स्पोर्ट्स डेस्क. हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय मेंस और वुमन्स टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। पहले पुरुष टीम सेमीफाइनल की रेस से बाहर हुई और अब महिला टीम भी आखिरी-4 में जगह नहीं बना सकी। इसके बाद पूर्व भारतीय गोलकीपर PR श्रीजेश ने हॉकी फेडरेशन पर सवाल उठाए हैं।
श्रीजेश ने कहा कि हर बार खराब प्रदर्शन को 'लर्निंग एक्सपीरियंस' कहकर बात खत्म नहीं होनी चाहिए। अगर टीम से गलती हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

वर्ल्ड कप कोई रिहर्सल नहीं है
श्रीजेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर की। उन्होंने कहा कि सिर्फ एशियन गेम्स और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर फोकस सही नहीं है। अगर टीम एशियन गेम्स में मेडल जीत भी जाती है, तो क्या इससे वर्ल्ड कप में हुई गलतियां खत्म हो जाएंगी?
श्रीजेश ने कहा- वर्ल्ड कप कोई रिहर्सल नहीं है। यहां अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है। अगर टीम फेल होती है तो उससे जुड़े सवाल भी पूछे जाने चाहिए। भारत जब दुनिया की बड़ी टीमों से हारता है तो उसे अक्सर 'लर्निंग एक्सपीरियंस' बताया जाता है। वहीं, एशियाई टीमों के खिलाफ जीत को बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया जाता है।
उन्होंने आगे लिखा- भारत आखिर किस तरह की टीम बनाना चाहता है? सिर्फ अच्छी हॉकी खेलने वाली या फिर ऐसी टीम, जो दुनिया की टॉप टीमों को भी हरा सके?

महिला टीम को लेकर भी उठाए सवाल
श्रीजेश ने भारतीय महिला टीम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत की तारीफ की, लेकिन वर्ल्ड कप से ठीक पहले टीम के चीफ कोच की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है और इसकी जवाबदेही कौन लेगा?
श्रीजेश की बात का मतलब साफ है। हार से सीखना जरूरी है, लेकिन हर बार हार को 'लर्निंग एक्सपीरियंस' कहकर आगे बढ़ जाना भी सही नहीं है। टीम कहां चूकी, गलती किससे हुई और उसे सुधारने की जिम्मेदारी किसकी है, इन सवालों के जवाब भी मिलने चाहिए।
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महिला टीम सेमीफाइनल से बाहर
भारतीय वुमन्स टीम भी सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबला 0-0 से ड्रॉ रहा। भारतीय वुमन्स टीम को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए यह मैच हर हाल में जीतना था, जबकि ऑस्ट्रेलिया के लिए ड्रॉ ही काफी था। भारतीय खिलाड़ियों ने गोल करने के कई मौके बनाए, लेकिन कोई भी मौका गोल में नहीं बदल सका।
मैच के आखिरी 5 मिनट में भारत ने बड़ा रिस्क लिया। गोलकीपर को बाहर बुलाकर उनकी जगह एक अतिरिक्त खिलाड़ी मैदान पर उतारा गया, लेकिन इसके बावजूद भारत गोल नहीं कर सका।

मेन्स टीम भी सेमीफाइनल की रेस से बाहर
भारतीय पुरुष टीम भी हॉकी वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो गई है। एम्सटेलवीन के वेगनर स्टेडियम में सोमवार को अर्जेंटीना ने भारत को 5-3 से हरा दिया। भारत को सेमीफाइनल की उम्मीद बनाए रखने के लिए अर्जेंटीना को कम से कम 2 गोल के अंतर से हराना जरूरी था, लेकिन टीम ऐसा नहीं कर सकी। खराब डिफेंस परेशानी बना रहा। भारत ने टूर्नामेंट में अब तक 5 मैच में 16 गोल खाए हैं। अर्जेंटीना के खिलाफ भी डिफेंस की कमजोरियां टीम पर भारी पड़ीं और जरूरी नतीजा भारत के हाथ नहीं आया।
अब 7वें-8वें नंबर के लिए खेलेगी टीम इंडिया
सेमीफाइनल की रेस से बाहर होने के बाद भारतीय पुरुष टीम अब 7वें और 8वें स्थान के लिए बेल्जियम के खिलाफ क्लासिफिकेशन मैच खेलेगी।


