ईरान वुमन्स कबड्डी टीम ने सिल्वर जीता: युद्ध के बीच 6 महीने में 3 बार कैंप बदला, 10 जगहों पर की ट्रेनिंग; देखें स्ट्रगल स्टोरी
Published: Updated:
4 min read

फाइनल में ईरान ने भारतीय टीम को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, उसे 37-37 से हार का सामना करना पड़ा। (फोटो सोर्स - सोशल मीडिया)
स्पोर्ट्स डेस्क. ईरान की महिला कबड्डी टीम के लिए एशियन गेम्स 2026 तक पहुंचना आसान नहीं था। टीम ने करीब 6 महीने तैयारी की। इस दौरान उसे 3 बार कैंप बदलना पड़ा। करीब 10 अलग-अलग जगहों पर ट्रेनिंग करनी पड़ी। ईरान में युद्ध के चलते टीम की तैयारी करीब 2 महीने तक प्रभावित रही। खिलाड़ी मैदान पर ट्रेनिंग के साथ अपने परिवार की चिंता भी कर रही थीं।
इसके बावजूद टीम ने एशियन गेम्स के फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में ईरान को भारत के खिलाफ 37-34 से हार मिली। टीम ने सिल्वर मेडल जीता। कोच गुलाम रजा माजंदरानी ने कहा कि इन हालात में टीम का फाइनल तक पहुंचना उपलब्धि है।
यह भी पढ़े: अभय सिंह भी स्क्वॉश फाइनल में: पाकिस्तान के मुहम्मद इरफान को 3-0 से हराया, अनाहत ने वर्ल्ड नंबर-6 को शिकस्त दी
6 महीने में 10 कैंप में तैयारी
ईरान के कोच ने बताया कि उनके पास टीम तैयार करने के लिए सिर्फ 6 महीने थे। इस दौरान युद्ध के कारण तैयारी बार-बार प्रभावित हुई। टीम को 3 बार अपना कैंप बदलना पड़ा। पहले साउथ और मध्य ईरान में समस्याएं आईं। इसके बाद टीम को उत्तर ईरान ले जाया गया। वहां हालात कुछ बेहतर थे। हालांकि, अच्छे कोर्ट और ट्रेनिंग फैसिलिटी ढूंढना फिर भी मुश्किल रहा।
युद्ध के कारण करीब 2 महीने की तैयारी पूरी तरह प्रभावित हुई। ऐसे में टीम के पास ट्रेनिंग के लिए बहुत कम समय बचा।

परिवार की चिंता के बीच खेलती रहीं खिलाड़ी
टीम की परेशानी सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं थी। खिलाड़ी रोज अपने परिवार से बात करती थीं। वे घरवालों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती थीं। टीम के कोच ने बताया कि खिलाड़ी हर दिन अपने परिवार से बात कर रही थीं और पूछती थीं कि वे सुरक्षित हैं या नहीं। टीम की औसत उम्र 22 साल से भी कम थी। कई खिलाड़ी सिर्फ 19 या 20 साल की थीं। ऐसे में युद्ध का मानसिक दबाव उनके लिए और मुश्किल था।
टीम के साथ साइकोलॉजिस्ट भी रहीं
खिलाड़ियों के मानसिक दबाव को संभालने के लिए टीम के साथ एक साइकोलॉजिस्ट भी थीं। कोच के मुताबिक, उन्होंने खिलाड़ियों को सही माइंडसेट में रखने में मदद की। कम उम्र की खिलाड़ियों के लिए यह सपोर्ट काफी जरूरी था। टीम के कोच ने माना कि इतनी कम उम्र में युद्ध जैसे हालात को समझना आसान नहीं होता।
इंटरनेशनल मैच भी नहीं खेल पाई टीम
ईरान की टीम को तैयारी के दौरान इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच खेलने का मौका भी नहीं मिला। सैंक्शंस के कारण दूसरी टीमों के साथ मैच आयोजित करना मुश्किल था। कोच ने बताया कि चीन ताइपे, भारत और जापान जैसी टीमों के साथ मैच कराने की कोशिश हुई। लेकिन ये मैच नहीं हो सके। ईरान की टीम साल में सिर्फ 2 या 3 प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले पाती है।
वहीं, भारतीय खिलाड़ियों को इससे कहीं ज्यादा कॉम्पिटिशन खेलने का मौका मिलता है। कोच के मुताबिक, खिलाड़ी सिर्फ प्रैक्टिस से नहीं सीखते। असली सुधार कॉम्पिटिशन खेलने से आता है।

भारत से सिर्फ 3 पॉइंट से हारा ईरान
फाइनल में ईरान ने भारतीय टीम को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, उसे 37-34 से हार का सामना करना पड़ा। टीम ने सिल्वर मेडल जीता। ईरान के कोच का मानना है कि दोनों टीमों की क्षमता में बहुत ज्यादा अंतर नहीं था। लेकिन भारतीय टीम को ज्यादा इंटरनेशनल और कॉम्पिटिटिव मैच खेलने का फायदा मिला। ईरान की टीम में ज्यादातर खिलाड़ी 24 साल से कम उम्र की हैं। कोच को उम्मीद है कि आने वाले सालों में अनुभव के साथ यह टीम और मजबूत होगी।
सिल्वर लेकर लौटा ईरान
युद्ध से प्रभावित तैयारी के बावजूद ईरान की महिला कबड्डी टीम एशियन गेम्स के फाइनल तक पहुंची। टीम ने 3 कैंप बदले। करीब 10 जगहों पर ट्रेनिंग की। करीब 2 महीने की तैयारी प्रभावित हुई। इन मुश्किल हालात के बीच टीम ने नागोया में सिल्वर मेडल जीता।

