संजू को बाहर करके रातभर सो नहीं पाया: गौतम गंभीर बोले- वैभव को खिलाना पड़ा, प्लेइंग-11 सोशल मीडिया से नहीं तय होती
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गौतम गंभीर ने इंडियन मेन्स क्रिकेट टीम के हेड कोच (Head Coach) का कार्यभार जुलाई 2024 में संभाला था। (@BCCI)
स्पोर्ट्स डेस्क. टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने इंग्लैंड दौरे पर ओपनर संजू सैमसन को हटाकर वैभव सूर्यवंशी को खिलाने के फैसले को अपने कोचिंग कॅरियर का सबसे मुश्किल फैसला बताया है। गंभीर ने कहा कि यह फैसला लेना उनके लिए आसान नहीं था। यहां तक कि इसके बाद वह रातभर सो नहीं पाए थे।
3 मैच में नहीं चले थे संजू
इंग्लैंड के खिलाफ पहले T20I में भारत को हार मिली थी। इससे पहले आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में भी संजू के बल्ले से ज्यादा रन नहीं आए थे। उन्होंने लगातार 3 मैच में 5, 0 और 1 रन बनाए थे।
इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने संजू की जगह वैभव को प्लेइंग-11 में शामिल किया। वैभव ने मैनचेस्टर में अपना T20I डेब्यू किया। हालांकि, उनके डेब्यू मैच में भी भारत को हार मिली। भारत ने यह सीरीज 4-0 से गंवाई।

गंभीर ने संजू से खुद की थी बात
गंभीर ने बताया कि उन्होंने इस फैसले के बारे में संजू से खुद बात की थी। उन्होंने कहा कि संजू उस समय अच्छे फॉर्म में थे। इससे पहले वह T20 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी रहे थे।दूसरी तरफ वैभव भी शानदार फॉर्म में थे। टीम को टॉप ऑर्डर में रन और अच्छी शुरुआत की जरूरत थी। इसी वजह से वैभव को मौका देने का फैसला लिया गया। गंभीर के मुताबिक, संजू ने इस फैसले को समझा और इसे अच्छे तरीके से लिया। उन्होंने कहा कि यह बातचीत सिर्फ उनके और संजू के बीच हुई थी।
अफगानिस्तान सीरीज में फिर लौटे संजू
इसके बाद संजू की अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की T20I सीरीज में टीम में वापसी हुई। इस बार वैभव को बाहर किया गया। संजू ने वापसी के साथ ही लगातार 2 फिफ्टी लगाईं। भारत ने यह सीरीज 3-0 से अपने नाम की। वैभव ने इससे पहले जिम्बाब्वे के खिलाफ T20I सीरीज में 2 फिफ्टी लगाई थीं। उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुना गया था।
सोशल मीडिया से नहीं तय होती प्लेइंग-11
गंभीर ने कहा कि टीम की प्लेइंग-11 सोशल मीडिया या बाहर की बातों से तय नहीं होती। टीम मैनेजमेंट को यह देखना होता है कि मैच जीतने के लिए सबसे सही कॉम्बिनेशन क्या है। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी के 3-4 मैच खराब होने पर उसे अचानक बाहर नहीं किया जा सकता। लंबे समय का प्रदर्शन भी देखा जाता है।

वैभव को भी करना पड़ सकता है इंतजार
गंभीर ने कहा कि वैभव काफी टैलेंटेड हैं और अच्छी फॉर्म में भी हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें हर मैच में मौका मिलेगा। उनके मुताबिक, लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को भी कभी-कभी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। टीम में कॉम्बिनेशन और कंटीन्यूटी जरूरी है।
गंभीर ने अपने 2 साल के कार्यकाल पर भी बात की
गौतम गंभीर ने टीम इंडिया के हेड कोच के तौर पर अपने 2 साल के कार्यकाल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सफलता भी मिली और असफलताएं भी आईं। गंभीर ने कहा कि टेस्ट, वनडे और T20 तीनों फॉर्मेट में उनका सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्होंने अपनी सफलताओं को खुशी से स्वीकार किया। साथ ही अपनी असफलताओं की जिम्मेदारी भी ली।

