बुमराह और हार्दिक समेत कई खिलाड़ी बार-बार चोटिल: 1 साल में 32 प्लेयर्स का इलाज, BCCI ने CoE का बजट 35 करोड़ बढ़ाया
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तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह अपने बाएं घुटने की चोट और पीठ की पुरानी समस्याओं से उबर रहे हैं। (फोटो सोर्स - @BCCI)
स्पोर्ट्स डेस्क. भारतीय क्रिकेट में पिछले 1-2 साल में खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने के मामले बढ़ते रहे हैं। इनमें पेसर जसप्रीत बुमराह और फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या का नाम भी है। पंड्या ने तो अपना घर मुंबई से बेंगलुरु में ही शिफ्ट कर लिया है, ताकि रिहैब में परेशानी ना हो। इसको लेकर कई बार बेंगलुरु स्थित BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) से सवाल भी हुए हैं।
CoE के हेड वीवीएस लक्ष्मण हैं। इसी बीच भारतीय बोर्ड ने पिछले एक साल की रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया है कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच CoE में 68 प्लेयर्स का इलाज और रिहैबिलिटेशन हुआ। इसमें इंडियन मेन्स टीम के 32 और वुमन्स टीम के 36 खिलाड़ी रहे।
CoE का बजट 92 करोड़ से बढ़कर 127 करोड़ हुआ
BCCI ने CoE के लिए बजट बढ़ाया है। 2025-26 में CoE का वास्तविक खर्च 92 करोड़ रुपए था। 2026-27 के लिए 127 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। यानी बजट में करीब 35 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
इस खर्च में सिर्फ खिलाड़ियों का इलाज शामिल नहीं है। एडमिनिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग कोर्स और मैचों से जुड़े खर्च भी इसी में आते हैं।
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मेडिकल हेड का पद खाली
CoE में स्पोर्ट्स साइंस मेडिसिन (SSM) हेड का पद मार्च 2025 से खाली है। नितिन पटेल ने उस समय इस्तीफा दिया था। BCCI ने सितंबर 2026 में इस पद के लिए आवेदन मांगे। रिपोर्ट के मुताबिक, टीम इंडिया और CoE की मेडिकल टीम के बीच कम्युनिकेशन में भी दिक्कतें रही हैं। दोनों के बीच बातचीत का मुख्य जरिया क्रिकेट हेड VVS लक्ष्मण रहे।
टीम इंडिया के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रू ने जून 2025 में खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट में कुछ बदलाव सुझाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, CoE अपनी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को लेकर तैयार नहीं था।
पिछले साल 32 बड़े खिलाड़ियों का हुआ इलाज
BCCI की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच इंडियन मेन्स टीम के 32 खिलाड़ियों ने CoE में इलाज या रिहैबिलिटेशन कराया। इनमें 20 सेंट्रली कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ी थे। बाकी 12 इंडिया-A या टारगेटेड कैटेगरी के थे।
कुल 68 वुमन्स और मेन्स खिलाड़ियों की चोट का इलाज किया गया। इनमें ज्यादातर सॉफ्ट टिश्यू इंजरी के मामले थे। ऋषभ पंत के पैर में फ्रैक्चर के बाद भी CoE में उनका इलाज हुआ। उन्हें जुलाई 2025 में मैनचेस्टर टेस्ट के दौरान चोट लगी थी। रोहित शर्मा ने भी CoE में रिहैबिलिटेशन कराया। IPL 2026 के बाद उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई थी।

इन खिलाड़ियों को बार-बार लगी चोट
जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा, हार्दिक पंड्या और प्रसिद्ध कृष्णा बार-बार चोटिल होने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, हर्षित राणा, हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी ने पिछले 18 महीनों में कम से कम 4 महीने CoE में बिताए।
30 सितंबर 2026 तक CoE में इलाज या रिहैबिलिटेशन के लिए पहुंचे खिलाड़ियों की लिस्ट में विराट कोहली, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव और हर्ष दुबे के नाम भी शामिल थे।
बजट में रखे गए 57 कैंप में से 15 नहीं हुए
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ऑडिटेड वित्त वर्ष में 57 कैंप और टूर्नामेंट आयोजित करने का बजट था। इनमें से 15 आयोजित नहीं हुए। CoE ने अलग-अलग उम्र और कैटेगरी के खिलाड़ियों के लिए 25 एलीट और हाई-परफॉर्मेंस कैंप लगाए। नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के लिए भी स्पेशल कैंप आयोजित किए गए।
इसके अलावा कोच, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग स्टाफ और मैच अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग कोर्स भी हुए।
37 खिलाड़ियों का ट्रेनिंग ब्लॉक प्रोग्राम
CoE ने खिलाड़ियों की फिटनेस और स्किल बेहतर करने के लिए ट्रेनिंग ब्लॉक प्रोग्राम शुरू किया। इसमें 37 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इनमें 11 सेंट्रली कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ी थे। बाकी 26 इंडिया-A या टारगेटेड कैटेगरी के थे। इस प्रोग्राम में खिलाड़ियों की स्ट्रेंथ और क्रिकेट स्किल पर काम किया जाता है।

टीम से बाहर होने पर फिटनेस टेस्ट जरूरी है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि खिलाड़ी टीम से बाहर क्यों है…
अगर खिलाड़ी चोट के कारण बाहर हुआ है, तो उसे वापसी से पहले मेडिकल क्लीयरेंस लेना पड़ता है। जरूरत के हिसाब से फिटनेस टेस्ट भी देना पड़ सकता है। लेकिन अगर कोई खिलाड़ी खराब फॉर्म या सिलेक्शन की वजह से टीम से बाहर है, तो उसे वापसी के लिए अपनी फॉर्म के साथ-साथ फिटनेस भी साबित करनी पड़ सकती है।

