UGC के नए नियमों पर फिर से विचार करेगा केंद्र: सुप्रीम कोर्ट में कहा- कमेटी बनाकर रिव्यू करेंगे; 29 जनवरी से रोक लगी हुई है
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UGC के जातिगत भेदभाव रोकने वाले नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (5 नवंबर) को सुनवाई हुई।
नेशनल डेस्क। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के जातिगत भेदभाव रोकने वाले नए नियमों को लेकर केंद्र सरकार अब दोबारा विचार करेगी। केंद्र ने गुरुवार (5 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि वह इन नियमों के रिव्यू के लिए एक कमेटी बनाने का सोच रही है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने केन्द्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा- कमेटी बनाने का मकसद स्टूडेंट्स की चिंताओं को समझना और यह तय करना है कि किसी भी वर्ग को नियमों से परेशानी न हो।
सरकार का क्या कहना है?
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा कि सरकार का फैसला है कि हर स्टूडेंट का ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी को भी यह डर नहीं होना चाहिए कि उसके साथ गलत होगा। न ही किसी को असंतुष्ट महसूस करना चाहिए। यही कारण है कि सरकार इन नियमों पर नए सिरे से विचार करने का सोच रही है।
नए नियमों में क्या था?
UGC ने हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूट यानी कॉलेज/यूनिवर्सिटी में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए 2026 में नए नियम जारी किए थे। इनका उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को भेदभाव से कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। इनके तहत...
- जातिगत टिप्पणी या भेदभाव की शिकायतों के निपटारे के लिए सख्त समय-सीमा तय की गई
- शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू करना
- 60 दिनों के अंदर जांच पूरी करना अनिवार्य बनाया गया
- हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में 'समान अवसर केंद्र' बनाना ताकि सभी को बराबर मौका मिले
- एक 10-सदस्यों वाली 'इक्विटी कमेटी' और कैंपस और हॉस्टल में निगरानी के लिए 'इक्विटी स्क्वाड' बनाना
- पीड़ितों के लिए 24 घंटे चलने वाली एक इक्विटी हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल की व्यवस्था

29 जनवरी से रोक लगी हुई है
सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स और ऑर्गनाइजेशन ने इन नियमों के कुछ कड़े प्रावधानों का विरोध किया। इनका कहना था कि नए नियमों के चलते फर्जी मामले दर्ज कर सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स को परेशान किया जा सकता है। इन नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
29 जनवरी को इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि नियम पहली नजर में साफ नहीं हैं और इनके नतीजे काफी दूर तक जा सकते हैं। कोर्ट ने यह भी चिंता जताई थी कि इन नियमों से समाज में बंटवारा बढ़ सकता है और इसका असर खतरनाक हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC से नए नियमों को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं पर जवाब मांगा था। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आदेश दिया था कि फिलहाल UGC के 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
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