IAF के ट्रांसपोर्ट प्लेन की सबसे ऊंची लैंडिंग: लद्दाख में 13,629 फीट की ऊंचाई पर उतारा IL-76MD; यहां से चीन बॉर्डर महज 25 km दूर
Published:
2 min read

रूस में निर्मित IL-76MD ट्रांसपोर्ट विमान की कार्गो क्षमता 40-50 टन है।
नेशनल डेस्क. इंडियन एयरफोर्स (IAF) ने लद्दाख के न्योमा एयरबेस पर 13,629 फीट की ऊंचाई पर ट्रांसपोर्ट विमान (IL-76MD) की सफल लैंडिंग कराई। यह इस विमान की दुनिया में अब तक की सबसे ऊंची लैंडिंग है। न्योमा एयरबेस LAC के बेहद करीब है, यहां से चीन बॉर्डर की दूरी करीब 25km है।
इंडियन एयरफोर्स ने 7 नबंवर को सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए लिखा- 13,629 फीट, एविएशन हिस्ट्री में नई उड़ान।
2025 में C-130J सुपर हरक्यूलिस की हुई थी लैंडिंग
इस एयरबेस पर IL-76MD जैसे भारी विमानों के उतरने से बॉर्डर एरिया में बहुत कम समय में भारी मिलिट्री साजो-सामान, टैंक, हथियार और एक्स्ट्रा सैनिकों को पहुंचाना आसान हो जाएगा, जिससे इंडियन आर्मी की ताकत काफी मजबूत होगी। इस एयरफील्ड पर सितंबर 2009 में सबसे पहले AN-32 विमान उतरा था और नवंबर 2025 में एयर चीफ ने यहां C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से लैंडिंग की थी। हालांकि IL-76MD विमान की कार्गो कैपेसिटी AN-32 और C-130J से बहुत अधिक है।

ट्रांसपोर्ट विमान IL-76MD की खासियत
यह रुस में बना एक ट्रांसपोर्ट प्लेन है। इस विमान में 4 इंजन लगे हुए हैं। इसकी 40-50 टन तक कार्गो ले जाने की क्षमता है। टैंक, आर्टिलरी, आर्म्ड व्हिकल, जवानों ले जा सकता है।
यह खबर भी पढ़ें; शक्ति शर्मा बनीं पहली महिला एयर वाइस मार्शल: नॉन मेडिकल बैकग्राउंड से हैं; 1994 में IAF में हुईं थी कमिशन
न्योमा एयरबेस में लैंडिग खतरनाक क्यों
हाई अल्टिट्यूड होने की वजह से यहां की हवा पतली होती है। इस वजह से विंग लो लिफ्ट जनरेट कर पाते हैं। इंजन कम थ्रस्ट प्रोड्यूस करता है। रनवे की दूरी कम है।आस पास पहाड़ियां भी हैं। यही वजह है कि इसे लैंडिंग के लिहाज से खतरनाक माना जाता है। 13,629 feet पर एयर प्रेशर समुद्र लेवल से 40% कम होता है। इस स्थिति में भारी ट्रांसपोर्ट विमान की लैंडिंग चुनौतीपूर्ण बन जाती है।

