संसद में SIR पर चर्चा नहीं हो सकती: अमित शाह ने सच में यह कहा था? प्रहलाद जोशी का दावा- वीडियो क्रॉप किया गया; हकीकत क्या
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SIR पर गृह मंत्री अमित शाह के एक साल के अंदर दो अलग-अलग बयान देने के दावे हैं। इस पर अब सियासी घमासान मचा हुआ है। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। बीते दो दिनों से गृह मंत्री अमित शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। इसमें वह कहते नजर आ रहे हैं कि संसद में SIR पर चर्चा नहीं हो सकती। यह वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है।
यह वीडियो इसलिए ट्रेंड में है क्योंकि दो दिन पहले ही अमित शाह ने एक रैली के दौरान कहा था कि हम SIR पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार हैं।
यानी एक साल के भीतर एक ही मुद्दे पर अमित शाह के दो अलग-अलग बयान आने का दावा किया जा रहा है। इसे लेकर खूब मीम बन रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इन बयानों को शेयर करते हुए लिखा है कि अमित शाह जी आप मोदी जी को कन्फ्यूज कर रहे हो।
राहुल गांधी के इसी पोस्ट पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी के रिएक्शन ने अब एक नई बहस छेड़ी है। उन्होंने इस वीडियो को 'ऑउट ऑफ कंटेक्स्ट' यानी सब्जेक्ट से बाहर और 'क्रॉप' यानी अधूरा बताया है। यहां पूरा मामला समझते हैं...
शुरुआत कहां से हुई?
राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों से लगातार SIR पर चर्चा करने के लिए सीधे PM मोदी को चुनौती दे रहे हैं। वह बैक टू बैक पोस्ट कर रहे हैं कि मोदी जी वक्त और जगह तय करें, मैं इस मुद्दे पर उनसे डिबेट करने को तैयार हूं। राहुल गांधी ने यह जिद इसलिए पकड़ी क्योंकि SIR पर कांग्रेस के प्रोटेस्ट को BJP देश तोड़ने की साजिश बता रही है। हाल ही में BJP के तमाम नेताओं ने राहुल गांधी पर विदेशी मदद से देश में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं। जब PM मोदी ने भी एक रैली में इसी तरह की बात कही तो राहुल गांधी ने उन्हें इस मुद्दे पर बहस की चुनौती दे डाली।
अब अमित शाह का हालिया बयान पढ़ें
5 नवंबर 2026 को हरियाणा के करनाल में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली के दौरान अमित शाह ने कहा- आप मोदी जी को बहस की चुनौती देते हो। अगर आप वाकई SIR पर चर्चा करना चाहते हो तो हम संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस पर चर्चा करने को तैयार हैं।
इससे पहले हैदराबाद और अन्य रैलियों में भी वह इस तरह के बयान देते दिखे। BJP के कई लीडरों ने भी हाल ही में यह बात दोहराई है कि मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद बनी है, सड़कों पर इन मुद्दों पर चर्चा नहीं होती।
अब वायरल हो रहे पुराने स्टेटमेंट को देखें
अमित शाह इसमें कह रहे हैं- मान्यवर मेरा बहुत स्पष्ट मत है कि SIR पर इस सदन में चर्चा नहीं हो सकती। अगर चर्चा होती है और कुछ सवाल खड़े किए जाएंगे तो इसका जवाब कौन देगा ?
यह स्टेटमेंट 10 दिसंबर 2025 का बताया जा रहा है। यह संसद का शीतकालीन सत्र का वह दौर था, जब विपक्ष संसद में SIR पर चर्चा करने के लिए हर दिन हंगामा कर रहा था।
राहुल गांधी की पोस्ट और प्रहलाद जोशी का पलटवार
राहुल गांधी ने अमित शाह के इन दोनों बयानों की वीडियो क्लीप शेयर कर लिखा- अमित शाह जी, आप मोदी जी को कन्फ्यूज मत कीजिए। बस उन्हें मेरे साथ खुली बहस के लिए मना लीजिए। कोई भी मंच, कोई भी समय। डरो मत।
मोदी सरकार में मंत्री प्रहलाद जोशी ने राहुल गांधी की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा- अमित शाह जी का क्रॉप और आउट ऑफ कन्टेक्स्ट वीडियो शेयर करना एक ही बात साबित करता है कि राहुल गांधी ने SIR पर होमवर्क नहीं किया है।
उन्होंने लिखा- राहुल जी कन्फ्यूज आप हो। जब आप चुनाव जीतते हो, तो इलेक्शन प्रोसेस सही होती है और जब हारते हो तो उस पर अचानक सवाल खड़े हो जाते हैं। क्या लोकतंत्र के लिए आपकी यही समझ है?
प्रहलाद जोशी ने यह भी लिखा कि आप 2014, 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव हारे, जबकि तब SIR नहीं हुआ था तो क्या आप इन चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेते हो या ठिकरा कहीं और फोड़ते हो?
उन्होंने लिखा- अब जब अमित शाह जी आपको संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की चुनौती दे रहे हैं तो घबरा क्यों रहे हो। नाटक बहुत हो गया अब अपने तथ्यों को संसद में लेकर आओ और बहस करो।
हकीकत क्या?
हकीकत यह है कि अमित शाह के दोनों वायरल वीडियो सही हैं। यानी करनाल में उन्होंने SIR पर संसद में विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करने की बात कही। जबकि एक साल पहले उन्होंने संसद में ही यह कहा था कि सदन में SIR पर चर्चा नहीं हो सकती।
10 दिसंबर 2025 को लोकसभा में इलेक्टोरल रिफॉर्म पर चर्चा के दौरान सरकार ने विपक्ष की उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें SIR पर चर्चा की बात थी। सरकार ने इसे तकनीकी कारणों से खारिज किया था।
तब अमित शाह ने कहा था कि विपक्ष SIR पर चर्चा करना चाहता है। मैं बहुत स्पष्ट हूं कि सदन में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। SIR चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। भारत का चुनाव आयोग सरकार के अधीन काम नहीं करता। अगर चर्चा होती भी है और कुछ सवाल खड़े होते हैं तो इनका जवाब कौन देगा?
अमित शाह के इस बयान को अगले दिन कई अखबारों ने प्रमुखता से छापा भी था।
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