न मंजूर- न खारिज: फॉर्म 6 से जुड़े कॉलम पर SC का रुख; कहा- बिहार में SIR के वक्त ये कॉलम नहीं था
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फॉर्म 6 नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होता है। SIR के दौरान चुनाव आयोग ने इसके साथ घोषणापत्र जोड़ा है, इसमें वोटर को यह बताने को कहा गया था कि उसका नाम, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार वोटर लिस्ट में था या नहीं।
नेशनल डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ कर दिया कि उसने फॉर्म 6 के साथ जुड़े घोषणापत्र की न तो अनुमति दी और न ही इसे अस्वीकृत किया। कोर्ट ने कहा कि अभी इसका वैधता पर फैसला सुनाया जाना बाकी है। फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए किया जाता है।
कोर्ट ने कहा कि CJI सूर्यकांत की पिछले हफ्ते की गई टिप्पणी का मतलब सिर्फ यह बताना था कि मई 2026 के बिहार SIR के फैसले में फॉर्म 6 के साथ जुड़े घोषणापत्र की जांच नहीं की गई थी, क्योंकि उस समय इसका इस्तेमाल नहीं हुआ था।
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याचिकाकर्ता ने कहा- CJI ने चुनाव आयोग के दावे को खारिज किया
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने भारतीय निर्वाचन आयोग से संबंधित प्रिया मिश्रा की एक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान ये बात कही। याचिकाकर्ता के वकील नरेंद्र मिश्रा ने कोर्ट में कहा कि चीफ जस्टिस ने पिछले हफ्ते चुनाव आयोग के इस दावे को खारिज कर दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 के साथ घोषणापत्र को बरकरार रखा है।
मिश्रा ने कहा- 5 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान इस कोर्ट ने घोषित कर दिया था कि फॉर्म 6 के साथ कॉलम को उन्होंने अनुमति नहीं दी। लेकिन चुनाव आयोग ने कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमति मिली है। इस संबंध में मैं जानकारी चाहता हूं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस बागची ने कहा- फॉर्म 6 के साथ घोषणापत्र पर कोई फैसला नहीं हुआ है। हमने बस इतना ही कहा है। न इसे मंजूरी मिली और न ही इसे नामंजूर किया गया। उन्होंने आगे कहा- CJI ने कहा था कि जब बिहार SIR पर फैसला दिया गया, तब नया फॉर्म 6 नहीं था। सीजेआई ने ये नहीं कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी या नहीं। हम इस वैधता की जांच करेंगे।
अब इस याचिका पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर अन्य याचिकाओं के साथ 27 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
क्या है Form 6 में विवादित बदलाव?
Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है। जुलाई 2026 में इसमें SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। इसमें आवेदन करने वाले को यह बताने को कहा गया था कि उसका नाम, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार वोटर लिस्ट में था या नहीं।
चुनाव आयोग ने हाल ही में वोटर लिस्ट में नए नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 से SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया है। यह बदलाव उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया है, जहां SIR की प्रोसेस पूरी हो चुकी है।

