EC ने Form 6 से विवादित कॉलम हटाया: इस पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी; SIR पूरा होने वाले राज्यों में पुराने नियम वाला फॉर्म ही भरना होगा
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CEC ज्ञानेश कुमार (बीच में), चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (लेफ्ट) और विवेक जोशी (राइट)
नेशनल डेस्क. चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में नए नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 से SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया है। यह बदलाव उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया है, जहां SIR की प्रोसेस पूरी हो चुकी है।
चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर यह बदलाव 29 सितंबर की देर रात लागू हुआ। हालांकि, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभी जारी है, वहां Form 6 में SIR से जुड़ा अतिरिक्त प्रावधान उपलब्ध रहेगा।
क्या था Form 6 में विवादित बदलाव?
Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है। जुलाई 2026 में इसमें SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। इसमें आवेदन करने वाले को यह बताने को कहा गया था कि उसका नाम, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार वोटर लिस्ट में था या नहीं।
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रावधान को लेकर दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों आयुक्त ने इसे कानूनी रूप से अधिकृत नहीं होने का मुद्दा उठाया था। जोशी ने कहा था कि रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टोरल रूल्स, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म में इस तरह का बदलाव नियमों में संशोधन के बिना नहीं किया जा सकता। संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी।
26 सितंबर को आयोग ने क्या फैसला लिया?
विवाद के बीच 26 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक हुई। आयोग ने तय किया कि Form 6 में जोड़ा गया SIR संबंधी अतिरिक्त घोषणा-पत्र सिर्फ SIR के दौरान लागू रहेगा। SIR समाप्त होने के बाद सिर्फ Form 6 का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
आयोग ने यह भी तय किया कि जिन मतदाताओं को SIR के दौरान अनमैप्ड या लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी यानी तकनीकी गलतियों के आधार पर नोटिस मिलेगा, उनके डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर घर जाकर वेरिफाई करेंगे और डॉक्यूमेंट ECINET पर अपलोड करेंगे।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से शुरू हुआ विवाद
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर मतभेद की खबर सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज की थी। इनमें नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन, वोटर का नाम हटाने और जोड़ने जैसे मुद्दे शामिल थे।
अब नए वोटर्स पर क्या असर पड़ेगा?
जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां नए वोटर्स को अब Form 6 में पुराने SIR की वोटर लिस्ट से अपना, माता-पिता या दादा-दादी का लिंक बताने की जानकारी नहीं देनी होगी। वहीं, जिन राज्यों में SIR के दौरान वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने वालों को ये अतिरिक्त कॉलम भरना होगा।

