छत पर पानी देखने गई महिला पर बंदरों का हमला: गिरने से मौत हुई, लोगों ने नगर निगम से 5 लाख मुआवजा मांगा
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शिमला में बढ़ते बंदर, लंगूर और आवारा कुत्तों के कारण लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक महिला की मौत के बाद शिमला की नागरिक सभा ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन कर मुआवजे और जानवरों को कंट्रोल करने के लिए ठोस कार्रवाई की मांग की है। (फोटो AI जनरेटेड है)
नेशनल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बंदर, लंगूर और आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। सोमवार (14 सितंबर) को शिमला नागरिक सभा ने इस मुद्दे को लेकर प्रोटेस्ट किया। सभा ने नगर निगम से बंदरों के हमले के बाद छत से गिरकर जान गंवाने वाली महिला के परिवार को 5 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की।
सभा के मुताबिक, शिमला के कब्रिस्तान से सटे इलाके में एक महिला अपने घर की छत पर पानी देखने गई थी। इसी दौरान बंदरों ने उस पर हमला कर दिया। बचने की कोशिश में महिला छत से नीचे गिर गई। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा
सभा ने कहा कि शहर में बंदर, लंगूर और आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसका सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को है।
सभा का कहना है कि नगर निगम को इस समस्या की कई बार जानकारी दी गई, लेकिन अब तक इसका कोई परमानेंट हल नहीं निकला। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
खुले में खाना डालने से बढ़ रही परेशानी
नागरिक सभा ने शहर में जगह-जगह बंदरों, लंगूरों और कुत्तों को खुले में खाना खिलाने पर भी सवाल उठाए। सभा के मुताबिक, ऐसे स्थान अब जानवरों के जमा होने की तय जगह बन गए हैं। इससे वहां से गुजरने वाले लोगों पर हमले और कुत्तों के काटने का खतरा बढ़ गया है।
सभा ने कहा कि जानवरों के हमले में लगी चोट का इलाज तो हो सकता है, लेकिन बच्चों और महिलाओं के मन में पैदा होने वाला डर लंबे वक्त तक बना रह सकता है। कुत्तों के काटने से गंभीर बीमारियों का खतरा भी रहता है।
नसबंदी के दावों के बावजूद कम नहीं हुई संख्या
सभा ने आरोप लगाया कि पिछले कई साल से बंदरों और कुत्तों की नसबंदी की बात कही जा रही है, लेकिन जमीन पर इसका असर नजर नहीं आ रहा। जानवरों की संख्या कम होने के बजाय और बढ़ती दिख रही है।
नागरिक सभा ने मांग की कि कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए और रिहायशी इलाकों में लगातार पहुंच रहे बंदरों और लंगूरों को भी उनके नेचुरल इलाकों की ओर ले जाने का अरेंजमेंट किया जाए।
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