इंसानों को खत्म कर सकता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस?: जिन CEO ने दुनिया को AI दिया, वही अब बोले- रफ्तार कम करो; कैसे शुरू हुई नई बहस
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पिछले हफ्ते AI से इंसानों के अस्तित्व पर खतरे को लेकर एक स्टेटमेंट आया। अब इस पर दुनिया की टॉप AI कंपनियों के चीफ अपनी बात रख रहे हैं।
नेशनल डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया में अब तक नौकरियों के खत्म होने का ही डर था लेकिन अब खौफ इससे कहीं ज्यादा बढ़ गया है। अब बात इंसानों के ही खत्म होने के डर पर आ गई है।
AI की सबसे बड़ी कंपनियों के कुछ टॉप बॉस और रिसर्चर खुद कह रहे हैं कि AI को बहुत तेजी से आगे बढ़ाना खतरनाक हो सकता है। खौफ इतना बढ़ गया है कि Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने साफ कहा है कि इसके ग्रोथ की रफ्तार थामने की जरूरत है। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और xAI के CEO एलन मस्क भी इससे सहमत हैं। Google DeepMind के को-फाउंडर डेमिस हसाबिस भी AI के लिए एक वर्ल्डवाइड रेगुलेटरी बॉडी की जरूरत बता रहे हैं।
कहानी शुरू कहां से हुई?
इस पूरी कंट्रोवर्सी की शुरुआत सितंबर के दूसरे हफ्ते में हुई। Anthropic के एक रिसर्चर जैकब कॉक्सॉन ने कंपनी छोड़ते हुए एक गंभीर चेतावनी दी। उनका कहना था कि OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियां self-improving superintelligence यानी ऐसे AI मॉडल बनाने की रेस में हैं जो खुद को और बेहतर बनाने की क्षमता हासिल कर सकते हैं।
जैकब ने दावा किया कि AI बनाने वाले लोगों को खुद इस बात का डर है कि यह तकनीक इंसानों को खत्म कर सकती है और यह सिलसिला इस दशक (2030) के खत्म होने से पहले शुरू हो सकता है लेकिन इसके बावजूद कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
उनकी बात सोशल मीडिया पर वायरल हुई और AI से सेफ्टी को लेकर बहस शुरू हो गई। Anthropic के कुछ और कर्मचारियों ने भी उनकी चिंता से सहमति जताई। एक रिसर्चर ने कहा कि AI की रफ्तार बहुत ज्यादा तेज हो चुकी है और Artificial Superintelligence यानी ASI के खतरे से निपटने के लिए अभी हमारे पास तैयारी नहीं है।

फिर आया डारियो अमोडेई का बयान
इस बहस को सबसे बड़ा मोड़ Anthropic के CEO डारियो अमोडेई के बयान से मिला। अमोडेई ने कहा कि AI की कैपिसिटी बढ़ाने की रफ्तार को धीमा करना जरूरी है। उनका तर्क है कि AI जितनी तेजी से शक्तिशाली हो रहा है, उतनी तेजी से इंसानों के पास उसके खतरे समझने और रोकने के तरीके तैयार नहीं हो रहे।
उनके मुताबिक अगर AI की रफ्तार पर कोई कंट्रोल नहीं रहा तो AI की कैपबिलिटी इंसानों की उसे समझने और कंट्रोल करने की कैपिसिटी से आगे निकल सकती है। अमोडेई ने इसके लिए तीन बड़े सुझाव दिए...
1. AI कंपनियां आपस में मिलकर safety standards बनाएं
OpenAI, Anthropic, Google जैसी कंपनियां सिर्फ एक-दूसरे से आगे निकलने की रेस में न रहें, बल्कि AI safety के लिए कुछ साझा नियम बनाएं।
2. बाहर के एक्सपर्ट AI कंपनियों की जांच करें
AI कंपनियों में independent evaluators को अंदर तक पहुंच दी जाए ताकि वे देख सकें कि कंपनियां सेफ्टी रूल्स का पालन कर रही हैं या नहीं।
3. दुनिया के देशों को साथ आना होगा
AI का खतरा सिर्फ अमेरिका या चीन का मुद्दा नहीं है। इसलिए इसके लिए दुनियाभर के देश मिलकर काम करें।
सबसे चौंकाने वाली बात: मस्क और ऑल्टमैन भी साथ
यहां कहानी और दिलचस्प हो जाती है। एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन एक-दूसरे के सबसे बड़े आलोचक रहे हैं। लेकिन इस मुद्दे पर दोनों अमोडेई के साथ खड़े नजर आए।
मस्क ने अमोडेई की बात का समर्थन करते हुए सीधा कहा- “Dario is right.”
सैम ऑल्टमैन ने भी independent evaluators को AI कंपनियों में employee-level access देने के विचार का समर्थन किया और कहा कि OpenAI भी ऐसा करने को तैयार है।

Google DeepMind के को-फाउंडर का भी रिएक्शन आया
Google DeepMind के को-फाउंडर डेमिस हसाबिस AI safety को लेकर काफी वक्त से चेतावनी देते रहे हैं। इस बार उन्होंने अमोडेई के आर्टिकल पर रिएक्ट करते हुए लिखा- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वक्त में इंसानी दिमाग जैसी लगभग सभी कैपिसिटी के साथ काम कर सकती है। इससे दवाओं की खोज, नई ऊर्जा, एडवांस मटेरियल और दूसरी बड़ी समस्याओं को हल करने में मदद कर सकती है। लेकिन इसके साथ साइबर हमले, बायोलॉजिकल और परमाणु खतरे बढ़ सकते हैं। ऐसे AI को कंट्रोल करना चुनौती होगी।
उन्होंने कहा- अमेरिका में एक स्वतंत्र Frontier AI Standards Body बने, जो सबसे शक्तिशाली AI मॉडल्स की रेगुलर और सख्त जांच करे, खासकर साइबर सिक्योरिटी, जैविक खतरों और AI के गलत इस्तेमाल जैसे मामलों में। यह बॉडी AI कंपनियों को सेफ्टी स्टैंडर्ड का पालन करने का दबाव बनाए और जरूरत पड़ने पर इनकी रफ्तार पर लगाम लगाने का भी काम करें।
यानी हसाबिक का कहना है कि AI का भविष्य सिर्फ टेक कंपनियों के हाथ में न छोड़ें। सरकारें, वैज्ञानिक और पूरा समाज मिलकर यह तय करे कि इस तकनीक का इस्तेमाल मानवता के फायदे के लिए कैसे किया जाए।
कुल मिलाकर साफ है कि AI मॉडल्स डेवलप कर रही टेक कंपनियां अब AI की रेस को खत्म कर इसकी पेस को वहीं तक सीमित करना चाहती है, जितना इंसान इनको कंट्रोल कर सके।

अमेरिका और चीन में रेस
AI कंपनियों के कुछ सबसे बड़े नाम सेफ्टी की बात कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी सरकार AI race में पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने AI डेवलपमेंट धीमा करने की मांग को खारिज किया है। उनका तर्क है कि अमेरिका को AI में चीन से आगे रहना जरूरी है।
उधर, चीन के सरकारी अखबार ने भी AI को लेकर चल रही लेटेस्ट कंट्रोवर्सी पर निगेटिव रिएक्शन दिया है। Anthropic के अमोडेई के AI की रफ्तार को थामने वाली बात पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका की टेक्नोलॉजी में डोमिनेंस बनाए रखने की कोशिश बताया है।
अखबार का सवाल है कि अगर अमेरिकी कंपनियां AI की रफ्तार धीमी करने की बात कर रही हैं, तो क्या वे सच में इंसानों की सेफ्टी के लिए चिंतित हैं या चीन को AI रेस में पीछे रखने की रणनीति बना रहे हैं?
असली सवाल: क्या AI सच में इंसानों को खत्म कर सकता है?
इसका सीधा जवाब अभी हां या ना में नहीं दिया जा सकता। AI एक्सपर्ट्स के बीच इस बात पर भी सहमति नहीं है कि AI से रिस्क कितना बड़ा है। कुछ लोग इसे इंसानों के खात्मे के हथियार के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ लोगों का कहना है कि अभी AI से जुड़े ज्यादा वास्तविक खतरे महज गलत जानकारी, साइबरक्राइम, फ्रॉड, नौकरी और प्राइवेसी तक ही सीमित हैं।
लेकिन इस बहस को नजरअंदाज करना भी मुश्किल है, क्योंकि अब चेतावनी देने वाले लोग सिर्फ बाहर के नहीं हैं। AI बनाने वाली कंपनियों के अंदर काम कर चुके लोग और खुद उनके CEO खतरे की बात कर रहे हैं।
AI की कहानी में शायद पहली बार ऐसा हो रहा है कि जिस तकनीक को बनाने के लिए कंपनियां अरबों-खरबों डॉलर खर्च कर रही हैं, उसी तकनीक के सबसे बड़े खिलाड़ी अब कह रहे हैं- थोड़ा रुककर चलते हैं। मुद्दा यह नहीं है कि AI को रोकना है या नहीं। असली सवाल यह है कि AI की रफ्तार इतनी न हो कि वह इंसानों की समझ और कंट्रोल से भी आगे निकल जाए।
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