ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका का इनाम का ऐलान: जानकारी देने पर 168 करोड़ देगा; ट्रम्प बोले- तेहरान डील के लिए बेताब
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अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की जानकारी देने वालों के लिए 20 मिलियन डॉलर तक के इनाम का ऐलान किया है। - फाइल
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ी जानकारी देने वालों के लिए 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 168 करोड़ रुपए तक के इनाम का ऐलान किया है।
यह जानकारी देने वालों को जरूरत पड़ने पर किसी सुरक्षित देश में शिफ्ट करने की सुविधा भी दी जा सकती है। अमेरिका का यह कदम ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच 8 महीने से जारी जंग को खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है।
आखिर अमेरिका किस तरह की जानकारी चाहता है और इस इनाम के पीछे उसकी क्या रणनीति है... आइए समझते हैं।
रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस प्रोग्राम के तहत मिलेगा इनाम
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 7 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी। यह इनाम अमेरिकी विदेश विभाग के रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस (Rewards for Justice) प्रोग्राम के तहत दिया जाएगा।
इस प्रोग्राम की शुरुआत 1984 में हुई थी। इसके तहत अमेरिकी नागरिकों और नेशनल थ्रेट को खतरे से बचाने में मदद करने वाली जानकारी देने वालों को आर्थिक इनाम दिया जाता है।
अमेरिका को किस तरह की जानकारी चाहिए
अमेरिका को ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों, वहां मौजूद सेंट्रीफ्यूज, यूरेनियम एनरिचमेंट से जुड़े इक्विपमेंट और उनकी आवाजाही की जानकारी चाहिए। इसके अलावा न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़े वैज्ञानिकों, टेक्निकल स्टाफ और दूसरे लोगों के बारे में जानकारी देने पर भी इनाम मिल सकता है। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि 20 मिलियन डॉलर का पूरा इनाम पाने के लिए किस स्तर की जानकारी जरूरी होगी।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, ईरान ने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के सेफगार्ड्स नियमों का पालन नहीं किया है। इसके चलते एजेंसी ईरान में सेंट्रीफ्यूज जैसे अहम न्यूक्लियर इक्विपमेंट के प्रोडक्शन और स्टॉक पर नजर रखने की अपनी क्षमता खो चुकी है। इसे 'कंटिन्यूटी ऑफ नॉलेज' कहा जाता है। अमेरिका का कहना है कि वह इस जानकारी को फिर से हासिल करना चाहता है।
ट्रम्प बोले- ईरान समझौते के लिए बेताब
इनाम का ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में मीडिया से बात की। उन्होंने दावा किया कि ईरान जंग खत्म करने और अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए बेताब है। ट्रम्प ने कहा- हम इस समय ईरान से निपट रहे हैं। वे किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहते हैं।
ट्रम्प ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले नहीं किए होते, तो आज इजराइल का वजूद खतरे में होता। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो वह उनका इस्तेमाल कर चुका होता और पूरे मिडिल ईस्ट को तबाह कर देता। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सेना और न्यूक्लियर प्रोग्राम को भारी नुकसान पहुंचाया है।
पिकैक्स माउंटेन पर ट्रम्प की नजर
ट्रम्प ने ईरान में एक-दो और ठिकानों पर हमले की चेतावनी दी है। इनमें पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) भी शामिल है। यह नतांज के पास जमीन के नीचे बना एक बेहद सुरक्षित ठिकाना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 1 नवंबर को कहा था कि अमेरिका इसे 10 मिनट में निशाना बना सकता है।
3 नवंबर को उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस ठिकाने पर एक घंटे के भीतर हमला किया जा सकता है। ईरान लगातार यहां न्यूक्लियर फैसिलिटी होने से इनकार करता रहा है।
इंटेलिजेंस जुटाने की कोशिश जारी
एक तरफ कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है। इसका मकसद जंग दोबारा शुरू होने से रोकना है। दूसरी तरफ अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी इस हफ्ते कहा था कि उनका देश बातचीत के जरिए संकट का समाधान निकालने के लिए तैयार है। ऐसे में इनाम का ऐलान दिखाता है कि अमेरिका बातचीत के साथ-साथ ईरान के न्यूक्लियर नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर भी जोर दे रहा है।

