2 करोड़ जमा करने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राजपाल यादव: 1.15 करोड़ का DD दिखाया, 85 लाख के लिए प्रॉपर्टी के खरीदार को ले आए; कोर्ट में क्या-क्या हुआ
Published:
4 min read

एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस केस में एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को 5 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 2 करोड़ जमा करने थे। लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए। जब सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ तो बुधवार (7 अक्टूबर) को वह खुद कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को 1.15 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट (DD) दिखाया और बाकी 85 लाख रुपए के लिए अपनी प्रॉपर्टी के खरीदार की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि बची हुई रकम ये देंगे।
अब सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को 13 अक्टूबर तक कुल 2 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि रकम जमा होने के बाद ही वह दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ उनकी याचिका पर विचार करेगा, जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए 3 महीने की सजा सुनाई गई थी।
RTGS नहीं हुआ तो DD लेकर पहुंचे राजपाल यादव
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को राजपाल यादव के वकील ने बताया कि वे रकम जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहुंचे थे। वहां RTGS के जरिए भुगतान नहीं हो सका।
इस पर कोर्ट ने राजपाल यादव के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा- कानून का इस तरह इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि राजपाल यादव को पहले भी रकम जमा करने के मौके दिए गए। अब तक दी गई मोहलत का मकसद सिर्फ शिकायतकर्ता की रकम सुरक्षित करना था।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस दौरान यह इशारा भी किया कि इसी तरह चलता रहा तो कोर्ट उनकी सजा बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है।

क्या है मामला?
यह मामला करीब 5 करोड़ रुपए के लोन से जुड़ा है, जो राजपाल यादव ने 2010 में M/s Murli Projects Pvt Ltd से अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए लिया था।
लोन चुकाने के लिए राजपाल यादव ने 1.05 करोड़ रुपए के 7 चेक दिए थे। ये सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद उनके खिलाफ चेक बाउंस का केस शुरू हुआ।
वक्त के साथ ब्याज और दूसरे खर्च जुड़ने से बकाया रकम बढ़ती गई। इसी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए 3 महीने की सजा सुनाई थी।
राजपाल बोले- फिल्म में 200-250 करोड़ का नुकसान हुआ
कोर्ट में सुनवाई के बाद राजपाल यादव ने ANI से बातचीत में कहा कि फिल्मों के लिए इस तरह लोन नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि घर बनाने या जमीन खरीदने के लिए लोन लिया जा सकता है, लेकिन फिल्म बनाने के लिए यह पैकेज डील या निवेश का मामला होता है।
राजपाल यादव ने कहा कि वह खुद करीब 100 फिल्मों पर काम कर चुके हैं, इसलिए उन्हें एक फिल्म बनाने के लिए लोन लेने की जरूरत क्यों होगी। यानी उनका कहना था कि यह पैसा मुरली प्रोजेक्ट्स ने इन्वेस्ट किया था, जो फिल्म फ्लॉप होने के कारण डूब गया।
हालांकि राजपाल यादव ने यह भी कहा कि कोर्ट सर्वोपरी है और उसका हर फैसला उन्हें स्वीकार है।
CJI ने फिल्म के नाम से किया मजाक
सुनवाई के बाद बेंच और राजपाल यादव के बीच हल्की-फुल्की बातचीत भी हुई। राजपाल यादव ने बताया कि 'अता पता लापता' फिल्म की वजह से उन्हें करीब 200-250 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि फिल्म के प्रोड्यूसर्स को भी नुकसान उठाना पड़ा।
इस पर CJI सूर्यकांत ने फिल्म के नाम का जिक्र करते हुए मजाक में कहा- आपकी फिल्म की तरह आपका पैसा भी अता-पता लापता हो गया।
CJI ने उन्हें सलाह दी कि वे अच्छी फिल्म बनाएं और लोगों का मनोरंजन करें। उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाले वकील भी अच्छे अभिनेता होते हैं और उन्हें अपनी फिल्मों में लिया जा सकता है।
यह भी पढ़ें...

