यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिला जर्नलिस्ट भी हिरासत में: दिल्ली पुलिस से FIR की मांग को लेकर रातभर थाने के बाहर बैठे थे 17 लोग; CJP ने लगाए मारपीट के आरोप
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दिल्ली में CEC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस पर यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को ही सोमवार (05 अक्टूबर) सुबह हिरासत में ले लिया गया। वह करीब 16 अन्य लोगों के साथ संसद मार्ग थाने के बाहर रातभर बैठी थी। इन लोगों की मांग थी कि महिला पत्रकारों की शिकायत पर FIR दर्ज की जाए और आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो।
सोमवार सुबह पुलिस ने सभी 17 लोगों को एक-एक करके हिरासत में लिया और बस से दिल्ली कैंट थाने ले गई। हिरासत में लिए गए लोगों में फ्रीलांस पत्रकार, यूट्यूबर और शिकायत करने वाली महिला शामिल है।
शिकायत का स्टेटस जानना चाहते थे
महिला पत्रकार ने मीडिया से कहा कि वे पुलिस अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायत पर अब तक हुई कार्रवाई का पता लगाना चाहते थे। उनका कहना था कि वे थाने के अंदर जाकर पुलिस अधिकारियों से बात करना चाहते थे।
वहीं, पुलिस के मुताबिक नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत बिना परमिशन के पांच या उससे ज्यादा लोगों के जुटने, प्रदर्शन करने जैसी गतिविधियों पर रोक है। पुलिस का यह भी कहना है कि संसद मार्ग प्रदर्शन के लिए तय जगह नहीं है। इसलिए लोगों को वहां से जाने के लिए कहा गया, जब ये लोग वहां से नहीं हटे तो इन्हें हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया।
3 महिला पत्रकारों ने पुलिस पर लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप
दिल्ली पुलिस ने रविवार को बताया था कि उसे तीन अलग-अलग महिला पत्रकारों से शिकायत मिली है। इन महिलाओं ने आरोप लगाया कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन को कवर करने के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ यौन उत्पीड़न और बदसलूकी की।
पुलिस के मुताबिक, इन शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। रविवार को तीनों महिलाओं के बयान दर्ज किए गए। पुलिस प्रदर्शन वाली जगह की CCTV फुटेज भी जांच रही है। DCP नेहा यादव ने प्रदर्शनकारियों से कहा है कि अगर किसी के पास इस घटना से जुड़ा कोई वीडियो है तो उसे क्राइम ब्रांच के साथ शेयर करें।
एक महिला पत्रकार ने अपनी शिकायत में बताया कि उसने नेहा बोरा और दूसरी महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाते देखा था। उसका आरोप है कि वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।
शिकायत के मुताबिक, जब पत्रकार ने इस बात की ओर पुलिसकर्मियों का ध्यान दिलाया तो एक पुलिस अफसर ने उसे धक्का दिया। महिला ने जब इसका विरोध किया तो वह अधिकारी वहां से चला गया।

एक दूसरी पत्रकार ने बताया कि वह शनिवार दोपहर करीब 3 बजे अशोका रोड पर प्रदर्शन की कवरेज कर रही थी। वह योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को हिरासत में लिए जाने की रिकॉर्डिंग कर रही थी। इसी दौरान उसे अपनी पीछे किसी के हाथ लगाने का अहसास हुआ।
उसका आरोप है कि पीछे मुड़ने पर एक पुलिस अफसर उसके बेहद करीब खड़ा था। महिला का कहना है कि जब उसने गलत तरीके से छूने को लेकर उस अफसर से सवाल किया तो अफसर ने उसके आरोपों को खारिज किया।
CJP ने कहा- पीड़िता को हिरासत में लेना शर्मनाक
इस मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने महिला पत्रकार का समर्थन किया है। पार्टी की लीगल टीम की चीफ रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जिस महिला ने ACP पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, उसे FIR दर्ज कराने की मांग कर रहे 17 अन्य लोगों के साथ हिरासत में लिया गया है। यह बेहद ही शर्मनाक है।
रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ पुलिस ने मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि दो लोगों को बुरी तरह पीटा गया। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है।
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