पुणे में गणेशोत्सव में शराबबंदी पर बॉम्बे HC सख्त: प्रशासन से पूछा- सिर्फ यहीं रोक क्यों; कहा- हर शराब पीने वाला कानून-व्यवस्था के लिए खतरा नहीं
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नेशनल डेस्क. महाराष्ट्र के पुणे में गणेशोत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि गणेशोत्सव के दौरान शराबबंदी का आदेश सिर्फ पुणे में ही क्यों लागू किया गया है? कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यापक प्रतिबंध के पीछे ठोस और तार्किक वजह होना चाहिए।
दरअसल, पुणे जिला प्रशासन ने गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 14 सितंबर से 26 सितंबर 2026 तक अलग-अलग इलाकों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। आदेश के मुताबिक, गणेश चतुर्थी और 25 सितंबर यानी अनंत चतुर्दशी को प्रमुख क्षेत्रों में पूर्ण ड्राई डे रखा गया है। 26 सितंबर को विसर्जन जुलूस खत्म होने तक इन क्षेत्रों में शराब बिक्री पर रोक रहेगी।
कोर्ट ने प्रशासन से आदेश वापस लेने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर प्रशासन आदेश वापस नहीं लेता तो हम सख्त कदम उठाएंगे।
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‘हर शराब पीने वाला कानून-व्यवस्था के लिए खतरा नहीं’
मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने शराबबंदी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ इस आधार पर कि कोई व्यक्ति त्योहार के दौरान शराब पीता है, यह नहीं माना जा सकता कि वह सड़क पर कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा।
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कोर्ट ने कहा कि हर शराब पीने वाला कानून-व्यवस्था के लिए खतरा नहीं है। बेंच ने यह भी कहा कि त्योहार के दौरान लोग उत्साह में शराब पी सकते हैं, लेकिन इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेंगे।
‘अचानक शराब बंद हुई तो अस्पताल भर जाएंगे’
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नियमित रूप से शराब का सेवन करने वाले लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी जताई। कोर्ट ने कहा- जो लोग शराब के नियमित आदी हैं, उनके लिए अचानक शराब उपलब्ध नहीं होने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं और ऐसे मामलों में अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
‘सिर्फ पुणे को लेकर क्या संदेश देना चाहते हैं’
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि प्रतिबंध सिर्फ पुणे में ही क्यों लगाया गया है। बेंच ने राज्य सरकार से पूछा कि आप सिर्फ एक खास शहर के खिलाफ क्या संदेश देना चाहते हैं? कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को सरकार से उचित निर्देश लेने को कहा। राज्य सरकार को मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा गया है।

