केरलम विधानसभा में ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पास: ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य; चुनाव आयुक्तों को अपॉइंट करने वाली कमिटी में भी बदलाव की मांग
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केरलम की कांग्रेस सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयुक्तों की अपॉइंटमेंट प्रोसेस बदलने की मांग की।
नेशनल डेस्क। चुनाव आयोग को लेकर देशभर में चल रहे प्रोटेस्ट के बीच केरलम विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पास किया है। केरलम ऐसा प्रस्ताव पास करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
सीएम वी.डी. सतीशन ने विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। इसमें SIR के दौरान वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों की शिकायत को दूर करने और हटाए गए योग्य वोटर्स को फिर से वोटर लिस्ट में शामिल करने की भी मांग की गई।
केरलम ने रखीं तीन मांगें
केरलम विधानसभा में पास प्रस्ताव में सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग नहीं की गई है, बल्कि चुनाव आयोग के कामकाज और चुनाव आयुक्तों के अपॉइंटमेंट प्रोसेस में बदलाव की भी बात कही गई है।
1. मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रोसेस शुरू हो
केरलम विधानसभा ने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए जरूरी प्रोसेस फौरन शुरू करने की मांग की है। प्रस्ताव में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
2. वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम वापस जोड़ें
प्रस्ताव में SIR के दौरान हुई गड़बड़ियों को दूर करने और उन सभी योग्य मतदाताओं के वोटिंग अधिकार तुरंत बहाल करने की मांग की गई है, जिनके नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाने के दावे हैं।
3. चुनाव आयुक्तों को अपॉइंट करने वाली कमिटी में बदलाव हो
केरलम सरकार ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली कमिटी में फिर से भारत के चीफ जस्टिस (CJI) को शामिल करने की मांग की। उसका कहना है कि इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता मजबूत होगी।

'वोट देने का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद'
सीएम वी.डी. सतीशन ने सोशल मीडिया पर प्रस्ताव को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहली बार केरलम विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पास किया है।
उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव, योग्य मतदाताओं के वोटिंग अधिकार छिनने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सतीशन ने कहा- वोट देने का अधिकार हमारे लोकतंत्र की बुनियाद है। किसी भी संस्था को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
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