ये बेवकूफी की हद: विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर पूर्व सॉलिसिटर जनरल साल्वे नाराज; कहा- कोर्ट को सियासी हथियार न बनाएं
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अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में हरीश साल्वे सॉलिसिटर जनरल चुने गए थे। वह 1999 से 2002 तक इस पद पर रहे।
नेशनल डेस्क। पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत से मिलने की कोशिश पर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष हर दिन सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे बेवकूफी की हद भी बताया है।
न्यूज एजेंसी IANS को दिए इंटरव्यू में साल्वे ने कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की स्ट्रेटजी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव में गड़बड़ी के आरोप हों या चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग, राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए।
दरअसल, राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का ऐलान किया है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों और आम लोगों से मार्च में शामिल होने की अपील की है। राहुल गांधी का इरादा CJI को ज्ञापन सौंपकर इलेक्शन प्रोसेस में गड़बड़ियों पर कार्रवाई की मांग करना है।
उधर, CJI ने विपक्ष से मिलने की अपील खारिज कर दी। उन्होंने सलाह दी है कि विपक्ष के डेलिगेशन को ज्ञापन देने के बजाय कोर्ट में याचिका दाखिल करनी चाहिए।
'सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक हथियार बना रहा विपक्ष'
साल्वे ने कहा कि विपक्ष का यह तरीका ज्यूडिशियल सिस्टम को राजनीतिक विवादों में खींचने की कोशिश है। उनके मुताबिक, मानवाधिकार, विरोध प्रदर्शन के अधिकार और संविधान के आर्टिकल-19 के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की आजादी जैसे मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा है। ऐसे में राजनीतिक दलों को ज्यूडिशियल प्रोसेस पर भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने कहा- जज अपना काम कर रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर क्या बोले साल्वे?
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर साल्वे ने कहा कि चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों की जांच कानूनी प्रोसेस के तहत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने CEC से जवाब मांगा है। चुनाव आयोग को अपना पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड कोर्ट के सामने रखने का मौका मिलेगा। इसके बाद कोर्ट तय करेगी कि गड़बड़ी हुई या नहीं और उस पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए।
साल्वे ने सवाल उठाया कि क्या हर दिन हंगामा करना और दिल्ली के लोगों को परेशान करना जरूरी है? उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से कारोबार और आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि CEC को पद से हटाने के लिए संवैधानिक प्रोसेस अपनानी होगी। सुप्रीम कोर्ट सीधे CEC को पद से नहीं हटा सकता।
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