पुणे में 10 दिन से चल रहा स्टूडेंट प्रोटेस्ट खत्म: सरकार ने मांगें मानी, जांच कमेटी में सबसे ईमानदार अफसर को शामिल किया; चेयरमैन को छुट्टी पर भेजा
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महाराष्ट्र में MPSC भर्ती एग्जाम में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर 10 दिनों से प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स ने सरकार के भरोसे के बाद आंदोलन फिलहाल खत्म कर दिया है।
नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ 10 दिनों से चल रहा स्टूडेंट प्रोटेस्ट रविवार (11 अक्टूबर) देर रात खत्म हो गया। पुणे में एसएम जोशी ब्रिज पर प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स की ज्यादातर मांगें सरकार ने मान ली हैं। सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है, जिसमें सीनियर IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को भी शामिल किया गया है। तुकाराम मुंढे की गिनती महाराष्ट्र के सबसे ईमानदार अफसरों में होती है।
पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार के डेलिगेशन और स्टूडेंट्स के बीच देर रात तक बातचीत चली। फिर डेलिगेशन ने स्टूडेंट्स के मुद्दों पर महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस से बातचीत की। इसी के बाद मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले ने छात्रों को भरोसा दिया कि उनकी मांग पर सरकार सहमत है। इसके बाद छात्रों ने आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया।
तुकाराम मुंढे समेत 5 सदस्य करेंगे जांच
मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले ने प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स से मुलाकात कर बताया कि MPSC में गड़बड़ियों की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। इसमें पूर्व जज दिलीप भोसले को अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा कमेटी में FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे, IPS अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व IAS अधिकारी गणेश पाटिल और रिटायर्ड जज पीडी नाइक शामिल होंगे।
NCP (SP) के विधायक रोहित पवार ने कमेटी में तुकाराम मुंढे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि कमेटी को सही तरीके से काम करने की पूरी आजादी मिलेगी।
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कौन हैं तुकाराम मुंढे
तुकाराम मुंडे 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के IAS ऑफिसर है। वह मई 2026 से महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आयुक्त के पद पर हैं। उनके इस पद पर आने के बाद महाराष्ट्र में रेस्तरां, ढाबों से लेकर बड़ी होटलों तक पर नियमों को फॉलो करने पर सख्ती हुई। कई बड़े होटलों के फूड लाइसेंस तक सस्पेंड कर दिए गए। यही कारण रहा कि उन्होंने हाल ही में इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भी पीछे छोड़ दिया।
भीमनवार बोले- जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहूंगा
MPSC चेयरमैन विवेक भीमनवार ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा- राज्य सरकार ने MPSC पेपर लीक मामले में ज्यूडिशियल जांच का ऐलान किया है।
भीमनवार ने लिखा- मैंने अपनी पूरी जिंदगी में हमेशा नैतिकता को प्राथमिकता दी है। इसलिए जांच पूरी होने तक पद पर बने रहने के बजाय मैंने इस दौरान छुट्टी पर जाने का फैसला किया है।
70 हजार पदों पर भर्ती समेत कई मांगें
सरकार ने स्टूडेंट्स की दूसरी मांगों पर भी विचार करने का भरोसा दिया है। इनमें ये मांगें शामिल हैं...
- पिछले तीन साल से खाली 70 हजार पदों पर भर्ती की जाए।
- जनवरी में होने वाली ग्रुप-C एग्जाम में पदों की संख्या बढ़ाई जाए।
- आंदोलन से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाएं।
- MPSC चेयरमैन और सचिव की नियुक्ति से पहले उनके बैकग्राउंड की जांच की जाए।
- आयोग की भर्ती प्रोसेस में सुधार किए जाएं, ताकि गड़बड़ियों को रोका जा सके।
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15 प्रदर्शनकारियों पर केस
आंदोलन के दौरान पुणे पुलिस ने दो दिन पहले प्रदर्शन से जुड़े 15 प्रतिनिधियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि उन्होंने बिना परमिशन प्रदर्शन किया, ट्रैफिक रोका और शहर में लागू प्रतिबंधों का उल्लंघन किया। प्रोटेस्ट की जगह पर ड्रोन उड़ाने के आरोप में भी पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
NCP (SP) के विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि इन पेपर लीक की वजह से करीब 25 लाख स्टूडेंट प्रभावित हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की कि वे MPSC चेयरमैन विवेक भीमनवार से अपनी दोस्ती के बजाय स्टूडेंट्स की चिंताओं को प्राथमिकता दें।

