तेल की सप्लाई को बंधक नहीं बनाया जा सकता: G20 में एनर्जी क्राइसिस पर भारत की दो टूक; जयशंकर बोले- समुद्री रास्तों में रुकावट बंद हो
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G20 मीटिंग में एस जयशंकर ने तेल और गैस की सप्लाई में पाबंदियों और समुद्री रास्तों की रुकावटों का मुद्दा उठाया।
इंटरनेशनल डेस्क। विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका में हो रही G20 की मीटिंग में एनर्जी क्राइसिस का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा- तेल और गैस की सप्लाई को पाबंदियों या समुद्री रास्तों में रुकावट डालकर नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा - एनर्जी सप्लाई और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर जानबूझकर हमले करना कीमतों को अपने हिसाब से काबू करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
जयशंकर ने शुक्रवार को G20 की बैठक में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एनर्जी मार्केट में रुकावटें लगातार बढ़ रही हैं। इनका असर भी अब ज्यादा देशों पर पड़ रहा है। दुनिया इस समय एनर्जी क्राइसिस का सामना कर रही है। इसकी बड़ी वजह सप्लाई को लेकर पैदा हुई असमंजस की स्थिति है।
G20 देशों से साथ मिलकर काम करने की अपील
जयशंकर ने कहा- पाबंदियों और समुद्री रास्तों में रुकावटों के कारण एनर्जी मार्केट में बार-बार गड़बड़ी हो रही है। कई देशों को जरूरत के मुताबिक तेल और गैस नहीं मिल पा रही है। वहीं, इनकी कीमतें भी लगातार परेशानी बढ़ा रही हैं। मेरी G20 देशों से अपील है की कि मिलकर काम करें, ताकि एनर्जी मार्केट खुला रहे। सप्लाई को लेकर भरोसा कायम रहे। भारत को भी LPG की लगातार और भरोसेमंद सप्लाई की जरूरत है।
क्रिटिकल मिनरल्स का मुद्दा भी उठाया
G20 मीटिंग में जयशंकर ने क्रिटिकल मिनरल्स का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा- ये ऐसे मिनरल्स हैं जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों, बैटरी, मोबाइल और दूसरी नई टेक्नोलॉजी में होता है। भारत ने इन मिनरल्स की खोज और रीसाइक्लिंग से उन्हें दोबारा हासिल करने के लिए नेशनल मिशन शुरू किया है। जयशंकर ने G20 के सामने क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलरिटी इनिशिएटिव का प्रपोजल भी रखा। इसका मकसद इस्तेमाल हो चुके सामान से जरूरी मिनरल्स निकालकर उन्हें फिर से काम में लाना है।
मौजूदा समय में जयशंकर का बयान अहम क्यों
जयशंकर का बयान ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में टेंशन की वजह से तेल और गैस की सप्लाई पर असर हुआ है। अमेरिका ने ईरान के क्रूड ट्रेड पर पाबंदियां लगाई हैं। वहीं, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भी अमेरिका प्रेशर बना रहा है।
सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाले कानून पर साइन किए थे। हालांकि, एक महीने के भीतर ही अमेरिका ने इस फैसले से पीछे हटने का इशराद दिया। इसके अलावा रूस के डीजल पर लगी पाबंदियां भी हटा ली गईं।
अमेरिका के एकतरफ टैरिफ का विरोध कर रहा भारत
जयशंकर का यह बयान इस लिहाज से भी अहम है कि भारत अमेरिका के एकतरफा टैरिफ और ट्रेड से जुड़ी पाबंदियों का विरोध कर रहा है। सेंट्रल कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल भी कह चुके हैं कि किसी देश की ओर से अकेले लगाए गए टैरिफ वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के नियमों के मुताबिक होने चाहिए।
अमेरिका ने भारत पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया
अमेरिका ने भारत पर कथित तौर पर जबरन मजदूरी से जुड़े आरोपों के आधार पर 10% टैरिफ लगाया है। इसके अलावा अमेरिकी एडमिनिस्ट्रशेशन ने भारत में जरूरत से ज्यादा प्रोडक्शन होने के आरोपों की जांच भी शुरू की है। भारत का कहना है कि इंटरनेशनल ट्रेड के नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

