राहुल गांधी ने अभिजीत दीपके को चाय पर बुलाया: CJP को अपने साथ लाना चाहती है कांग्रेस? प्रशांत भूषण-योगेन्द्र यादव को मीडिएटर की जिम्मेदारी!
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तस्वीर 13 अक्टूबर की है। राहुल गांधी के घर चाय पर विपक्षी नेताओं, स्टूडेंट लीडर्स और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच बैठक हुई थी। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। कांग्रेस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर अपना रुख बदलना शुरू कर दिया है। जिस संगठन को पार्टी के कई नेता आम आदमी पार्टी (AAP) का करीबी मानते थे, अब उसी के फाउंडर अभिजीत दीपके को राहुल गांधी के घर पर चाय का न्योता मिला है। कांग्रेस की ओर से यह न्योता ऐसे वक्त में दिया गया है, जब चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्षी दलों की एकजुटता पर जोर दिया जा रहा है।
CNN-News18 के मुताबिक, कांग्रेस ने दीपके तक पहुंचने की जिम्मेदारी सामाजिक कार्यकर्ताओं से संपर्क साधने में जुटे योगेंद्र यादव को दी है। वहीं, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण से भी दीपके तक पहुंचने और बीच की कड़ी बनने को कहा है।
राहुल गांधी का हालिया बयान भी CJP के लिए कांग्रेस के सॉफ्ट कॉर्नर को दिखाता है। राहुल गांधी ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले अलग-अलग गुटों के आंदोलन को एक ही विरोध का हिस्सा बताया था। बुधवार (14 अक्टूबर) को उन्होंने CJP लीडर आशुतोष रांका और सौरव दास के सपोर्ट में भी आवाज उठाई थी।
CJP को AAP की करीबी मानती है कांग्रेस
CJP की शुरुआत सोशल मीडिया पर चर्चा में आए एक समूह के तौर पर हुई। जुलाई में जंतर-मंतर पर स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद संगठन को ज्यादा पहचान मिली। इस आंदोलन के चलते तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
CJP ने खुद को एक ऐसे प्रेशर ग्रुप के तौर पर पेश किया है, जो सरकार और राजनीतिक दलों के फैसलों पर सवाल उठाएगा। हालांकि, कांग्रेस लीडरशिप अब तक इसे आम आदमी पार्टी का ही एक दूसरा रूप मानती आई है। पार्टी के कई नेताओं को लगता है कि CJP को ज्यादा जगह देने से कांग्रेस का अपना राजनीतिक स्पेस कम हो सकता है।
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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब तक CJP विपक्ष से अलग हटकर प्रदर्शन करती रही है। 2 अक्टूबर से चल रहे विपक्ष के प्रोटेस्ट में CJP कभी शामिल नहीं हुई। उसने 10 अक्टूबर को अलग से जंतर-मंतर मार्च का ऐलान किया। इसके बाद 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर कांग्रेस के विरोध मार्च में भी CJP शामिल नहीं हुई।
इन घटनाओं के बावजूद कांग्रेस ने अब CJP की ओर हाथ बढ़ाने का फैसला किया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध और SIR के मुद्दे पर अलग-अलग समूहों को साथ लाने की कोशिश कर रही है।
राहुल बोले- प्रदर्शन अलग-अलग नहीं, एक ही है
कांग्रेस के रुख में बदलाव का पहला बड़ा संकेत उस वक्त मिला, जब राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को एक ही आंदोलन का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा- कोई अलग-अलग प्रदर्शन नहीं हैं, एक ही प्रदर्शन है। हमें इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं या किस संगठन से आते हैं। अगर आप संविधान की रक्षा कर रहे हैं, जैसा कि हम कर रहे हैं, तो हम आपके साथ हैं। हम आपका समर्थन करेंगे, आपकी मदद करेंगे और आपकी रक्षा करेंगे।
राहुल ने इससे पहले जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने और तिरंगा फहराने वाले आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी को भी गलत बताया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है और इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है। राहुल के बयान के बाद दीपके ने उनकी तारीफ भी की थी।
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राहुल की चाय से CJP को क्या फायदा होगा?
राहुल गांधी के आवास, 5 सुनेहरी बाग रोड पर होने वाली टी-मीटिंग के लिए CJP को न्योता मिलना इन नए-नवेले संगठन के लिए बेहद खास है। इससे उसे विपक्ष के बड़े नेताओं तक पहुंच बनाने और अपने मुद्दों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का मौका मिल सकता है।
हालांकि, इस न्योते का मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस और CJP के बीच कोई गठबंधन हो गया है। फिलहाल यह राजनीतिक संपर्क बढ़ाने और साझा मुद्दों पर साथ आने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस के सामने चुनौती यह भी है कि वह विपक्षी एकता बनाए रखते हुए नए समूहों को साथ लाए, लेकिन अपनी राजनीतिक जगह भी सुरक्षित रखे। दूसरी ओर, CJP के लिए यह मौका अपने आंदोलन को राजनीतिक दलों के दायरे से बाहर रखते हुए विपक्ष के नेटवर्क तक पहुंचने का रास्ता खोल सकता है।
अब देखना होगा कि राहुल गांधी की इस पहल से CJP और कांग्रेस के बीच सहयोग कितना बढ़ता है और क्या यह साथ सिर्फ ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तक सीमित रहता है या आगे भी जारी रहता है। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि इस पूरे सीन में आम आदमी पार्टी क्या भूमिका निभाती है।

