पत्नी नाबालिग तो यौन संबंध बनाने पर POCSO लगेगा: केरल हाईकोर्ट ने कहा- मुस्लिम पर्सनल लॉ भी इससे नहीं बचा सकता; क्या है पूरा मामला
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केरल हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि नाबालिग पत्नी से रेप करने पर POCSO एक्ट से बचा जा सकता है।
नेशनल डेस्क। केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 27 साल के एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) और रेप केस को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाना अपराध है, चाहे वह आरोपी की पत्नी ही क्यों न हो।
मामला पलक्कड़ का है। आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ चल रहे केस को खत्म करने की मांग की थी। उसका कहना था कि उसकी पत्नी ने बदला लेने के लिए उसके खिलाफ शिकायत की है।
17 साल की उम्र में हुई थी शादी
आरोपी के मुताबिक, उसने लड़की से 23 जुलाई 2021 को इस्लामिक रीति-रिवाजों से शादी की। उस वक्त लड़की की उम्र 17 साल थी।
शिकायत के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2021 को आरोपी लड़की को शॉपिंग के लिए ले गया। इसके बाद वह दोनों घर आए। लड़की ने अपनी सास के साथ सोने की इच्छा जताई, लेकिन आरोपी ने उसे ऐसा नहीं करने दिया। वह उसे कमरे में ले गया और जबरदस्ती यौन संबंध बनाए। यह सिलसिला अगले चार दिनों तक चलता रहा। इस मामले में आरोपी पर किडनैपिंग समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया।
पत्नी के साथ संबंध बनाने को रेप नहीं माना जा सकता: आरोपी के वकील
हाईकोर्ट में आरोपी के वकील ने दलील दी कि IPC की धारा 375 के Exception 2 के तहत अगर पत्नी की उम्र 15 साल से कम नहीं है तो पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने को रेप नहीं माना जा सकता। वकील ने केस को कानून के गलत इस्तेमाल का उदाहरण बताया।
लेकिन जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने इस दलील को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि खुद याचिकाकर्ता के वकील ने माना है कि लड़की की उम्र घटना के वक्त 17 साल थी। इसलिए वह POCSO एक्ट के तहत साफ तौर पर 'बच्ची' की कैटेगरी में आती है।
कोर्ट ने कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध POCSO एक्ट के तहत गंभीर अपराध है। ऐसे मामले में आरोपी पर POCSO की धारा 6 के तहत aggravated penetrative sexual assault का केस बनता है। इसके अलावा IPC की धारा 376 के तहत रेप का मामला भी बनता है।
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'मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी हुई थी'- यह दलील भी नहीं चली
आरोपी ने यह भी कहा कि उसने लड़की से मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी की थी, इसलिए उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट ने इस पर कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि मुस्लिम रीति-रिवाजों के तहत शादी हुई थी, तब भी इससे आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि किसी पर्सनल लॉ के तहत शादी होने का मतलब यह नहीं कि POCSO एक्ट से बचा जा सकता है।

