फांसी से ही होगी मौत की सजा: दूसरे तरीकों से डेथ पेनल्टी देने की याचिका खारिज; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार चाहे तो बदलाव का रास्ता खुला
Published:
3 min read

नेशनल डेस्क। डेथ पेनल्टी पाने वाले कैदियों को फांसी के जरिए ही मौत देने का मौजूदा तरीका फिलहाल जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (18 अगस्त) को फांसी के बदले कोई दूसरा और ज्यादा मानवीय तरीका अपनाने की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि केंद्र सरकार चाहे तो इस पूरे मामले की नए सिरे से समीक्षा कर सकती है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। जनहित याचिकाओं में कहा गया था कि फांसी के दौरान कैदी को दर्द और तकलीफ होती है। यह तरीका भी अमानवीय है। ऐसे में मौत की सजा के लिए फांसी के अलावा किसी दूसरे तरीके पर विचार होना चाहिए।
SC ने फांसी को हटाया नहीं, लेकिन सरकार के लिए रास्ता खुला रखा
सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा तरीके में दखल देने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि भारत में मौत की सजा पर अमल के लिए फांसी का तरीका अभी बना रहेगा।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि उसका फैसला केंद्र सरकार को मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने से नहीं रोकता। अगर सरकार को लगता है कि कोई दूसरा तरीका कैदी की तकलीफ कम कर सकता है और ज्यादा मानवीय हो सकता है, तो वह इस पर विचार कर सकती है।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर भविष्य में नए वैज्ञानिक या मेडिकल सबूत सामने आते हैं, तो इस मुद्दे पर दोबारा विचार की गुंजाइश हो सकती है।

याचिका में क्या मांग की गई थी?
सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल यह नहीं था कि भारत में मौत की सजा रहनी चाहिए या नहीं। सवाल सिर्फ यह था कि मौत की सजा देने का तरीका क्या होना चाहिए।
भारत में 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' यानी बेहद गंभीर मामलों में मौत की सजा का प्रावधान है। याचिकाकर्ताओं ने इसी सजा को लागू करने के मौजूदा तरीके की जांच की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं ने फांसी की जगह दूसरे तरीकों पर विचार करने की मांग की थी। इनमें लेथल इंजेक्शन, गोली मारना और इलेक्ट्रिक चेयर जैसे विकल्प शामिल थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से किसी भी तरीके को अपनाने का आदेश नहीं दिया है।
अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में
सुप्रीम कोर्ट ने खुद फांसी की जगह कोई नया तरीका तय नहीं किया है। लेकिन सरकार चाहे तो इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की मदद से रिसर्च करा सकती है। इसमें मेडिकल साइंस, वैज्ञानिक सबूत और कानून से जुड़े पहलुओं को देखा जा सकता है।
यानी फिलहाल मौत की सजा पर अमल फांसी से ही होगा, लेकिन आने वाले समय में अगर ठोस वैज्ञानिक या मेडिकल सबूत सामने आते हैं, तो इसके तरीके में बदलाव की संभावना पूरी तरह बंद नहीं हुई है।
यह भी पढ़ें...

