पंजाब में BJP-SAD Alliance: क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल? मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात से बढ़ी हलचल
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सुखबीर बादल की 7 अगस्त (शुक्रवार) को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग हुई।
नेशनल डेस्क. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद पंजाब में BJP-SAD गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है। यह बैठक सिर्फ 10 मिनट चली, लेकिन इसकी टाइमिंग ने BJP-SAD के बीच अलायंस की खबरों को महत्व दे दिया है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। कभी SAD और BJP देश के सबसे स्ट्रांग अलायंसमें से एक थे।
जानिए दोनों पार्टियों की सबसे पुरानी दोस्ती, गठबंधन टूटने की वजह और 2027 पंजाब चुनाव से पहले क्या हैं समीकरण।

1996 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रकाश सिंह बादल, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने इस अलायंस को मजबूती दी। 1997 के पंजाब विधानसभा चुनाव में SAD-BJP गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की। प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री बने।
2007 और 2012 में साथ मिलकर सरकार बनाई
2007 में SAD-BJP गठबंधन ने मिलकर पंजाब में सरकार बनाई। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन सत्ता में लौट आया। उस समय पंजाब में पहली बार किसी सरकार ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की थी।
मोदी युग में बदला गठबंधन का चेहरा
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद BJP-SAD गठबंधन ने लोकसभा चुनाव साथ लड़ा। सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनीं।
कृषि कानूनों की वजह से टूटा रिश्ता
2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में किसानों का आंदोलन तेज हुआ। इसके बाद अकाली दल NDA अलग हो गया। सितंबर 2020 में हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। केंद्र सरकार ने नवंबर 2021 में 3 कृषि कानून वापस ले लिया, लेकिन इसके बावजूद BJP और SAD के रिश्ते वापस पटरी पर नहीं आए।

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BJP का अकेले चुनाव लड़ने पर फोकस
एक तरफ सुखबीर बादल SAD को दोबारा मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ BJP पंजाब में अपना संगठन और समर्थन बढ़ाने पर फोकस कर रही है। हालांकि BJP पंजाब की 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी का दावा कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मोगा की रैली में बोल चुके हैं कि BJP सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

