BJP अब NCP के मर्जर में जुटी!: रिपोर्ट में दावा- NDA का कुनबा बढ़ाने की कोशिश, लेकिन सुनेत्रा पवार और बेटे पार्थ राजी नहीं
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तस्वीर में सबसे आगे अजित पवार के बेटे पार्थ नजर आ रहे हैं। सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल भी दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल NCP में प्रफुल्ल पटेल साइडलाइन चल रहे हैं। पूरी कमान पार्थ और सुनेत्रा के हाथों में है। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने की अटकलें हैं। BJP चाहती है कि NCP के दोनों खेमों का विलय हो जाए लेकिन सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ इसके लिए राजी नहीं हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार को संसद में डिलिमिटेशन जैसे खास विधेयकों को पारित कराने के लिए और ज्यादा सपोर्ट की जरूरत है। ऐसे में BJP पूरी कोशिश कर रही है कि NCP के दोनों गुट एक होकर NDA को सपोर्ट करें। लेकिन सुनेत्रा पवार और पार्थ जानते हैं कि विलय होने पर पार्टी में शरद पवार और सुप्रिया सुले का कंट्रोल बढ़ जाएगा, जो वे बिल्कुल नहीं चाहते।
BJP अपने मिशन में जुटी
फिलहाल अजित पवार गुट की NCP बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा है, जबकि शरद पवार गुट की NCP (SP) कांग्रेस लीडरशिप वाले INDIA ब्लॉक में है। सूत्रों के मुताबिक, BJP दोनों दलों के नेताओं के संपर्क में है और मतभेद खत्म कर दोनों गुटों को साथ लाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट यह भी है कि BJP ने दोनों पक्षों को केंद्र सरकार में मंत्री पद देने का प्रस्ताव भी दिया है।
गुरुवार (16 जुलाई) शाम पार्थ पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इससे पहले मंगलवार (14 जुलाई) रात NCP (SP) के नेता जयंत पाटिल फडणवीस के घर पहुंचे थे। इस बैठक में NCP के सीनियर लीडर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे। गुरुवार रात NCP (SP) के लीडर जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात की।

विलय हुआ तो सुनेत्रा पवार की शर्तें क्या होंगी?
रिपोर्ट में सुनेत्रा पवार के करीबी सहयोगी के हवाले से लिखा गया है कि अगर दोनों पार्टियों का विलय होता है तो सुनेत्रा पवार यह मांग कर सकती हैं कि वह महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम बनी रहें।
इसके अलावा उनके पास मौजूदा मंत्रालय और NCP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी बरकरार रहे। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच असली विवाद सत्ता और पदों के बंटवारे को लेकर है।

