TMC छोड़ने वाले सांसद का यू-टर्न: NCPI नेता अबू ताहिर खान बोले- NDA में नहीं रहेंगे, मुस्लिम हित सबसे पहले
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TMC के 20 बागी सांसदों ने 14 जून को लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर NCPI में मर्जर की जानकारी दी।
नेशनल डेस्क. TMC छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने वाले सांसदों में से एक अबू ताहिर खान ने NDA छोड़ने पर बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को कहा- वे न तो NDA में रहेंगे और न ही BJP में शामिल होंगे। उन्होंने इसके पीछे मुसलमानों मेजॉरिटी के हितों का हवाला दिया।
खान ने कहा- हम किसी भी ऐसे बिल का समर्थन नहीं करेंगे जो मुसलमानों के हितों के खिलाफ हो। हम मुर्शिदाबाद से हैं और हमें मुसलमानों के हितों की रक्षा करनी है।
तीन सांसद NDA की बैठक से गायब रहे
बता दें, NCPI के 3 सांसद ताहिर खान, खलीलुर्हमान और यूसुफ पठान ने NDA की दूसरी बैठक में हिस्सा नहीं लिया। यह तीनों ही पश्चिम बंगाल के मुस्लिम-बहुल लोकसभा क्षेत्रों से आते हैं। खान ने कहा- वह और मुर्शिदाबाद के दो अन्य विधायक बैठक में शामिल होंगे। खान ने कहा- यह हमारे निर्वाचन क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों के बारे में है।

मुलाकात के बाद NCPI सांसद बापी हलदर ने कहा- बंगाल की मुख्यमंत्री को राज्य के विकास और सामाजिक व वित्तीय योजनाओं के समय पर वितरण में सहयोग का भरोसा दिलाया गया।
NCPI नेता ने PM से की मुलाकात
इससे पहले सोमवार को NCPI के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने सोमवार को PM मोदी से अलग से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब उनके BJP में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने दावा किया है कि 20 में से कम से कम 6 सांसद उनके संपर्क में हैं। TMC नेता कुणाल घोष ने कहा- BJP उन्हें बचा रही है। वरना उनकी लोकसभा सदस्यता चली जाती, क्योंकि वे TMC के टिकट पर चुनाव जीते थे। 2024 में TMC ने पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 29 सीटें जीतीं। 29 में से 20 नेताओं ने 14 जून को NCPI जॉइन कर ली और NDA में शामिल हो गए।
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विधानसभा से लेकर संसद तक कैसे बिखर गई TMC?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की सत्ता जाते ही बगावत शुरू हो गई थी। 4 मई को नतीजे आने के बाद ही पार्टी के विधायक और सांसदों ने ममता बनर्जी से दूरी बनानी शुरू कर दी। TMC के 58 बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर से मुलाकात कर खुद को ओरिजनल TMC बताया और ममता कैंप के चुने गए नेता विपक्ष की जगह ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की। स्पीकर ने लगे हाथ इसे कबूल भी कर लिया। अब विधायकों की संख्या और बढ़कर 64 होने के दावे हैं। यानी बंगाल में TMC के 80 में से 64 विधायक अब ममता से अलग हैं। यह आंकड़ा दो-तिहाई से ज्यादा है।

फिलहाल, TMC पूरी तरह टूट चुकी है। बनर्जी फैमिली इसे संभालने की कोशिशों में हैं लेकिन अब तक कामयाबा नहीं मिली है। यह भी रिपोर्ट्स हैं कि जल्द ही ममता कैंप वाली TMC अब कांग्रेस में मर्ज हो सकती है।

