IPL में एक प्लेयर की फीस 40 करोड़ संभव: मेगा ऑक्शन से बदल सकते हैं रिटेंशन रूल्स, फ्रेंचाइजी का पर्स भी 150 करोड़ का होगा
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ऑक्शन में पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स (Lucknow Super Giants) ने 27 करोड़ रुपए में खरीदा था। वहीं, अय्यर को 26.75 करोड़ रुपए मिले थे।
स्पोर्ट्स डेस्क. IPL में अब खिलाड़ियों की रिटेंशन फीस को लेकर बदलाव देखने को मिल सकता है। अगले मेगा ऑक्शन से पहले कुछ टॉप खिलाड़ियों ने अपनी फ्रेंचाइजी के सामने 40 करोड़ रुपए तक की फीस की मांग रखी है। क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 2 बड़े खिलाड़ियों ने साफ कर दिया है कि अगर उन्हें 40 करोड़ रुपए मिलते हैं, तभी वे अपनी मौजूदा टीम के साथ बने रहेंगे। साथ ही, फ्रेंचाइजी का ऑक्शन पर्स भी बढ़ाकर 150 करोड़ रुपए किया जा सकता है।
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पंत - अय्यर सबसे महंगे प्लेयर
इससे पहले भी कई प्लेयर्स रिटेंशन से इनकार कर ऑक्शन में उतर चुके हैं। ऋषभ पंत (Rishabh Pant) और श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) ने 2025 के मेगा ऑक्शन से पहले अपनी पुरानी टीमों के साथ बने रहने का फैसला नहीं किया था।
ऑक्शन में पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स (Lucknow Super Giants) ने 27 करोड़ रुपए में खरीदा था। वहीं, अय्यर को 26.75 करोड़ रुपए मिले थे।

150 करोड़ रुपए का पर्स
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले मेगा ऑक्शन में हर फ्रेंचाइजी का पर्स करीब 150 करोड़ रुपए हो सकता है। हालांकि, इस रकम पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। 2025 के मेगा ऑक्शन में टीमों का पर्स 120 करोड़ रुपए था। 2027 सीजन के लिए इसे बढ़ाकर 130 करोड़ रुपए किया गया है।
पिछले कुछ सालों में पर्स में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए अगले मेगा ऑक्शन में इसे करीब 150 करोड़ रुपए किए जाने की संभावना है।
अगर किसी प्लेयर को 40 करोड़ रुपये दिए जाते हैं, तो यह 150 करोड़ रुपये के कुल पर्स का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा होगा। ऐसे में जिन फ्रेंचाइजी को कई बड़े खिलाड़ियों को रिटेन करना है, उनके लिए बजट संभालना मुश्किल हो सकता है।
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खिलाड़ियों की फीस
पिछले मेगा ऑक्शन के लिए BCCI ने रिटेंशन के स्लैब 18 करोड़, 14 करोड़ और 11 करोड़ रुपए तय किए थे। हालांकि, फ्रेंचाइजी इन तय रकम से ज्यादा भी खिलाड़ियों को दे सकती थीं। इसके लिए उन्हें असल भुगतान की जानकारी देनी होती थी।
हेनरिक क्लासेन (Heinrich Klaasen) को 23 करोड़ और निकोलस पूरन (Nicholas Pooran) को 21 करोड़ रुपए मिले थे।
पिछले मेगा ऑक्शन के नियमों के अनुसार, 5 खिलाड़ियों को रिटेन करने पर फ्रेंचाइजी के ऑक्शन पर्स से 75 करोड़ रुपये घटा दिए जाते थे। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी टीम ने इन 5 खिलाड़ियों को रिटेन करने के लिए 80 करोड़ रुपये खर्च किए, तो उसके पर्स से 80 करोड़ रुपये ही कटते थे। यानी 75 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने पर टीम को उतनी ही रकम गंवानी पड़ती थी, जितना उसने खिलाड़ियों को रिटेन करने में खर्च किया।
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RTM का विकल्प
पिछले मेगा ऑक्शन से पहले रिटेंशन सिस्टम खत्म करने और सिर्फ राइट टू मैच (RTM) विकल्प रखने का सुझाव भी दिया गया था। इससे फ्रेंचाइजी ऑक्शन में बोली लगाकर खिलाड़ियों को वापस हासिल कर सकती थीं।
हालांकि, इस प्रस्ताव पर यह चिंता भी जताई गई थी कि RTM के विकल्प को देखते हुए दूसरी टीमें बोली बढ़ा सकती हैं। इससे खिलाड़ी की असली मार्केट वैल्यू का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल अगले मेगा ऑक्शन के रिटेंशन नियमों पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। खिलाड़ियों की फीस इस बात पर निर्भर करेगी कि फ्रेंचाइजी कितने खिलाड़ियों को अपने साथ रखना।

