पश्चिम बंगाल का नाम 'पश्चिम बंग' होगा: विधानसभा में आएगा प्रस्ताव; कैसे बदला जाता है राज्यों का नाम
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पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश कई बार हुई है। लेफ्ट सरकार से लेकर TMC ने नाम बदलने का प्रस्ताव पास किया, लेकिन हर बार केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी। (फाइल फोटो)
नेशनल डेस्क. पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंग किया जाएगा। BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को राज्य का नाम बदलने को लेकर दावा किया। उन्होंने कहा- इसे लेकर विधानसभा सत्र में बिल लाया जाएगा।
बता दें, सभी भाषाओं में सिर्फ पश्चिम बंग ही नाम होगा। अभी अंग्रेजी में West Bengal और हिंदी में पश्चिम बंगाल बोला जाता है। राज्य का नाम बदलने के बारे में पूछे जाने पर ANI से उन्होंने कहा- भाई, मुझे कितनी बार कहना होगा? नाम 'पश्चिम बंग' ही होगा।
'इसकी प्रक्रिया जल्द पूरी होगी'
उन्होंने इस हफ्ते की शुरुआत में ही संकेत दिया था कि नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया जल्द ही पूरी होने वाली है। उन्होंने कहा था- पश्चिम बंगाल, बंगला और बंगा जैसे नामों का इस्तेमाल अब नहीं किया जाएगा। भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा था- पश्चिम बंग भवन, पश्चिम बंगाल का पश्चिम, अब आपको लंबे समय तक पश्चिम बांग्ला, बांग्ला या बंगा जैसे नाम नहीं सुनने पड़ेंगे। पश्चिम बंग' (West Bengal) आ रहा है।
नाम बदलने की कई बार कोशिश हुई
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश कई बार हुई है। 1999 में लेफ्ट सरकार ने राज्य का नाम पश्चिम बंग रखने का प्रस्ताव रखा था।

कांग्रेस विधायक सौगत रॉय के सुझाव के बाद इसे पश्चिम बांग्ला रखने का प्रस्ताव रखा गया। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे खारिज कर दिया। 2011 में TMC के सत्ता में आने के बाद फिर से पश्चिम बंग नाम रखने का प्रस्ताव रखा। लेकिन केंद्र की UPA-2 ने इसे खारिज कर दिया। 2016 में फिर से 3 नाम सुझाए गए, बांग्ला, हिंदी में बंगाल और अंग्रेजी में BENGAL किए जाने का प्रस्ताव रखा।
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किसी राज्य का नाम बदलने का कॉन्स्टिट्यूश्नल प्रोसेस क्या और कैसा है…..
इससे पहले ये जानना जरूरी है कि केंद्र सरकार (आर्टिकल 3 के तहत) मर्जी से किसी राज्य का नाम तब्दील नहीं कर सकती। ये तभी संभव है जब उस राज्य (जिसका नाम बदला जाना है) की विधानसभा इस बारे में प्रस्ताव पारित करे।

इसके बाद 8 स्टेप्स फॉलो करने होते हैं…..
- पहला: राज्य विधानसभा प्रस्ताव भेजे।
- दूसरा: केंद्रीय गृह मंत्रालय जांच करे। संतुष्ट होने के बाद मसौदा बनाए। इसे कानून मंत्रालय के पास भेजकर तमाम संवैधानिक मामलों पर राय ले।
- तीसरा : केंद्रीय कैबिनेट मंजूरी दे।
- चौथा : जांच और दोबारा मंजूरी के लिए उस राज्य की विधानसभा को मसौदा (ड्राफ्ट) भेजे।
- पांचवां : विधानसभा अगर कुछ बदलाव चाहती है तो इस पर लिखित राय या जवाब दे।
- छठवां : विधानसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी जरूरी। इसके बाद केंद्र सरकार संसद में विधेयक लाती है।
- सातवां : संसद में साधारण बहुमत से पारित कराना होता है।
- आठवां : राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होती है। उनके सिग्नेचर के बाद संविधान की पहली अनुसूची में राज्य के पुराने नाम की जगह नया नाम आ जाता है।

