CJP प्रोटेस्ट में शामिल होने वाला कॉन्स्टेबल बर्खास्त: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में तैनात था; विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद एक्शन
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कॉन्स्टेबल ने CJP के मंच से लोगों को संबोधित करते हुए अपना इस्तीफा देने का दावा किया था। जबकि वह पहले से सस्पेंड चल रहा था।
नेशनल डेस्क. दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट में शामिल होने वाले उत्तराखंड के कॉन्स्टेबल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। वह पहले से सस्पेंड चल रहा था। विभागीय जांच में कॉन्स्टेबल शेर सिंह को गंभीर कदाचार और सेवा नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया।
पिथौरागढ़ SP अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने कहा- उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। कॉन्स्टेबल शेर सिंह को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
कॉन्स्टेबल का व्यवहार गंभीर कदाचार
SP कोंडे ने बताया, विभागीय जांच, सरकारी रिकॉर्ड की जांच और संबंधित नतीजों से यह साबित हुआ कि कॉन्स्टेबल का व्यवहार गंभीर कदाचार की कैटेगिरी में आता है और शेर सिंह ने उत्तराखंड सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 2002 का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा- अनुशासन बनाए रखने और फोर्स में जनता का भरोसा कायम रखने के लिए यह सख्त कार्रवाई की गई।
SP ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस अनुशासनहीनता, दुर्व्यवहार और सर्विस नियमों के उल्लंघन के मामलों में जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाती है।
मंच से इस्तीफे का दावा किया था
कॉन्स्टेबल शेर सिंह जुलाई में CJP के प्रोटेस्ट में चर्चा में आया था। कॉन्स्टेबल ने CJP के मंच से लोगों को संबोधित करते हुए अपना इस्तीफा देने का दावा किया था। उन्होंने राज्य की भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। सिंह ने दावा किया कि उत्तराखंड पटवारी भर्ती परीक्षा के पेपर किराने की दुकानों पर बेचे जा रहे थे। उत्तराखंड पुलिस ने बताया था कि 28 जून से वह बिना इजाजत सरकारी ड्यूटी से एब्सेंट रहने के कारण पहले ही 20 जुलाई को सस्पेंड कर दिया गया था।
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