SC जज ने पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया: साथी जज बोले- ये बहुत मुश्किल वक्त, हमला कहां से हो जाए पता नहीं; क्या है मामला
Published:
3 min read

पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शील नागू ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को पंजाब सरकार की एक याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। मामला मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफिस से जुड़े भ्रष्टाचार की जांच का था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच CBI से कराने का आदेश दिया था। इसी फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
जस्टिस नागू और जस्टिस दीपांकर दत्ता की दो सदस्यीय बेंच के पास यह याचिका पहुंची। जस्टिस नागू पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं। वह इस दौरान पंजाब सरकार से जुड़े मामलों और जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर चुके हैं। ऐसे में जस्टिस दीपांकर ने कहा कि मामला दूसरी बेंच को भेजा जाना चाहिए।
जस्टिस दीपांकर ने कहा- ये बहुत मुश्किल वक्त है। पता नहीं हमला कहां से हो जाए। इसलिए यह मामला किसी दूसरी बेंच को सौंपा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में 17 दूसरी बेंच हैं। यानी जस्टिस दीपांकर का कहना था कि सुनवाई में किसी तरह के भेदभाव का आरोप न लगे, इसलिए बेहतर है कि जस्टिस नागू इस मामले की सुनवाई न करें क्योंकि वह पहले पंजाब सरकार से जुड़े करप्शन के कुछ मामलों की सुनवाई कर चुके हैं और फैसले भी दे चुके हैं।
पंजाब सरकार की ओर से पेश सीनियर वकील विकास सिंह ने बताया है कि अब मामले को दूसरी बेंच के सामने सोमवार को सुनवाई के लिए रखा जाएगा।
क्या है मामला?
पूरा मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 5 अक्टूबर के आदेश से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफिस से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए CBI को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि ED की ओर से दी गई जानकारी से पहली नजर में ऐसा लगता है कि इसमें सीनियर सरकारी अफसरों की भूमिका हो सकती है। कोर्ट ने CBI को दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया था।
पंजाब सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उसका कहना है कि बिना पर्याप्त सबूत के CBI को केस दर्ज करने का निर्देश दिया गया। सरकार ने यह सवाल भी उठाया है कि इस तरह की कार्रवाई से केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों के बंटवारे पर असर पड़ सकता है।
251 पेज की FIR में भगवंत मान के OSD का नाम
CBI ने इस मामले में 251 पेज की FIR दर्ज की है। इसमें CM भगवंत मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन समेत छह लोगों के नाम हैं।
FIR में आरोप लगाया गया है कि इन लोगों का एक नेटवर्क सरकारी पदों पर तैनाती, प्रशासनिक फैसलों, टेंडर, लाइसेंस और दूसरी सरकारी प्रोसेस को प्रभावित करता था। आरोप है कि इसके बदले रिश्वत ली जाती थी।
इस मामले में ED ने पंजाब DGP गौरव यादव को कुछ इनपुट भी दिए थे लेकिन जब पंजाब पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो एक जनहित याचिका दायर की गई और इसकी सुनवाई करते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने CBI को FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया।
यह भी पढ़ें...

