OTT पर कंट्रोल की तैयारी?: RSS ने पैनल बनाया, सरकार को सुझाव देगा; कंटेंट से समाज में नैतिक गिरावट आने का दावा
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RSS की ‘कुटुंब प्रबोधन’ गतिविधि परिवार से जुड़े मूल्यों को मजबूत करने, अलग-अलग पीढ़ियों के बीच रिश्ते बेहतर बनाने और सामाजिक मेल-जोल बढ़ाने पर काम करती है। उससे मिले फीडबैक के आधार पर OTT कंटेंट को लेकर चिंता बढ़ी है। संघ के कुछ पदाधिकारी OTT प्लेटफॉर्म को समाज में नैतिक गिरावट के सोर्स में से एक मानते हैं। (फोटो AI जनरेटेड है।)
नेशनल डेस्क। OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक नया कदम उठाया है। उसने एक पैनल बनाया है, जिसमें शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट, पूर्व वाइस चांसलर और संघ के प्रचारक शामिल किए गए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, RSS का मानना है कि OTT पर बड़ी संख्या में कल्चर बिगाड़ने वाला कंटेंट आता है। इससे निपटना जरूरी है। इसीलिए कुछ महीने पहले एक पैनल बनाया गया। इसकी पहली बैठक पिछले महीने हुई थी।
पैनल का काम OTT कंटेंट को लेकर केन्द्र सरकार को सुझाव देना है। वह अपनी सिफारिशें तैयार करेगा, जिन्हें आगे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और OTT के रेगुलेशन से जुड़े अन्य सेंट्रल डिपार्टमेंट को भेजी जाएंगी।
RSS को क्यों लगा कि पैनल बनाना चाहिए?
इंडियन एक्सप्रेस ने RSS से जुड़े एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि संघ में लोगों को लगता है कि OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कुछ कंटेंट का परिवार और खासकर युवाओं पर गलत असर पड़ रहा है।
सूत्र के मुताबिक, संघ में इस बात पर चर्चा हुई है कि OTT के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो आपत्तिजनक कंटेंट पर नजर रख सके। इसके लिए ‘सेंसर बोर्ड’ जैसी किसी रेगुलेटरी बोर्ड की जरूरत है।
एक अन्य सूत्र ने बताया कि पैनल के लिए अभी कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। अपनी सिफारिश देने से पहले कानून से जुड़े लोगों और इस क्षेत्र के जानकारों से भी चर्चा की जाएगी।
मोहन भागवत पहले भी उठा चुके हैं OTT का मुद्दा
RSS प्रमुख मोहन भागवत पहले भी OTT कंटेंट पर चिंता जता चुके हैं। 12 अक्टूबर 2024 को नागपुर में दशहरे के दिन उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट को लेकर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा था कि OTT पर दिखाई जाने वाली कुछ चीजें इतनी आपत्तिजनक हैं कि उनके बारे में बात करना भी ठीक नहीं लगता। भागवत ने OTT को कंट्रोल करने के लिए कानून की जरूरत बताई थी और इसे समाज में नैतिक गिरावट के कारणों में से एक बताया था।
फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड, OTT के लिए रेगुलेटरी बोर्ड नहीं
सिनेमा हॉल में रिलीज होने वाली फिल्मों को Central Board of Film Certification (CBFC) से सर्टिफिकेट लेना होता है। इसे आम तौर पर सेंसर बोर्ड कहा जाता है। यह व्यवस्था Cinematograph Act, 1952 के तहत काम करती है।
वहीं OTT प्लेटफॉर्म के लिए फिल्मों की तरह कोई सेंसर बोर्ड नहीं है। OTT कंटेंट Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 और इससे जुड़े IT और आपराधिक कानूनों के तहत आता है। ऐसे में शिकायत मिलने पर केन्द्र सरकार ही OTT प्लेटफॉर्म पर एक्शन लेती है।
22 जुलाई को लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने बताया था कि सरकार ने दो साल में भारत में 50 OTT प्लेटफॉर्म को बैन किया है। सरकार के मुताबिक, इन प्लेटफॉर्म पर अश्लील कंटेंट दिखाने और IT Act, भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 और Indecent Representation of Women (Prohibition) Act, 1986 के सेक्शन-4 के उल्लंघन के मामले सामने आए थे।
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