फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद घमासान: राहुल गांधी बोले- साबित हो गया कि ज्ञानेश कुमार ने गैरकानूनी काम किया, CJP ने कहा- CEC ने देश से झूठ बोला
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर फिर निशाना साधा और फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर सवाल उठाए।
नेशनल डेस्क। SIR के लिए फॉर्म-6 में हुए बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद CEC ज्ञानेश कुमार घिर गए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि अब यह साफ हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में गैरकानूनी तरीके से बदलाव किया। वहीं, CJP के आशुतोष रांका ने कहा कि क्या यह समझा जाए CEC ज्ञानेश कुमार ने पूरे देश से झूठ बोला?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (5 अक्टूबर) को CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में हुए हालिया बदलावों की बात निकली। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी।
दिलचस्प बात यह कि इलेक्शन कमीशन के एक प्रेस नोट में यह बात साफ लिखी गई थी कि SIR पीरियड के लिए फॉर्म-6 में बदलाव को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिली है। बस इसी बात को लेकर अब यह सवाल उठने लगे हैं कि चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस रिलीज में झूठ क्यों बोला था।
एक और सबूत मिला: राहुल गांधी
राहुल ने इस मसले पर लिखा कि यह अब पूरी तरफ साफ है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किया। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी एक और ऐसा सबूत है जो बताती है कि CEC ने BJP को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुर्पयोग किया। राहुल ने यह भी कहा कि लोकतंत्र पर हुए इस हमले के लिए ज्ञानेश कुमार के साथ उन सभी लोगों की जवाबदेही तय होगी, जो इसमें शामिल रहे।
राहुल गांधी आगे लिखते हैं कि चुनाव आयोग के कमिश्नर भी यह कह चुके हैं कि फॉर्म-6 को गैरकानूनी तरीके से बदला गया। अब सवाल यह है कि ECI में वह शख्स कौन था, जिसने टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (TCS) को ये बदलाव करने का ऑर्डर दिया था? और TCS में वो कौन था, जिसने इस पर साइन किए?

क्या है फॉर्म-6?
फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए वोटरों का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए किया जाता है। SIR के दौरान इसमें एक बड़ा बदलाव हुआ। चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 भरने के लिए एक अतिरिक्त जानकारी देना अनिवार्य कर दिया। इसमें नए आवेदकों से पूछा जा रहा था कि क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR वोटर लिस्ट (2003) में शामिल था या नहीं?
अगर आवेदक 'हां' चुनता था, तो उसे अपने पूर्वजों का पुराना विधानसभा क्षेत्र, पोलिंग बूथ और सीरियल नंबर जैसी बारीक जानकारियां देनी होती थीं। इसे भरना स्वैच्छिक था, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर इस एक्स्ट्रा कॉलम को भरे बिना फॉर्म-6 सबमिट नहीं हो पाने की कई शिकायत मिली थी।
इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग में भी आपसी मतभेद सामने आया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्त ने फॉर्म-6 में बदलाव को गलत बताया था और इस बारे में CEC को लेटर लिखकर आपत्ति भी दर्ज कराई थी।
आधिकारिक तौर पर झूठ बोला: आशुतोष रांका
CJP लीडर आशुतोष रांका ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी चुनाव आयोग के 26 सितंबर के प्रेस नोट के ठीक उलट है। उस प्रेस नोट में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के बदलावों को मंजूरी दी, जबकि ऐसा नहीं था। तो क्या इससे यह समझा जाए कि CEC ज्ञानेश कुमार ने देश की जनता से आधिकारिक तौर पर झूठ बोला?
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