प्रशांत भूषण बोले- हम चाहते हैं रिजीम चेंज हो: नेहा बोरा ने भी बांग्लादेश से जुड़ा बयान दिया था; राजनाथ सिंह का पलटवार- में आग लगाना ही इनका एजेंडा
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नेहा बोरा के बांग्लादेश और प्रशांत भूषण के रिजीम चेंज वाले बयान पर राजनाथ सिंह ने जवाब दिया है।
नेशनल डेस्क. CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि इनका असली मकसद सत्ता परिवर्तन है। बीजेपी का ये बयान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि हां हम चाहते हैं कि रिजीम चेंज हो। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इन बयानों से प्रदर्शनकारियों का एजेंडा साफ हो गया है।
दरअसल, CJP संस्थापक अभिजीत दिपके, AISA की नेहा बोरा, एक्टर प्रकाश राज और प्रशांत भूषण ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान प्रशांत भूषण ने कहा- हां हम लोग चाहते हैं कि रिजीम चेंज हो। उसमें क्या गलती है। बीजेपी ने भी रिजीम चेंज के लिए बार बार आंदोलन किए। रिजीम चेंज हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।
नेहा बोरा ने बांग्लादेश की तारीफ की थी
पहले NEET पेपर लीक और अब CEC के खिलाफ प्रदर्शन कर चर्चा में आईं नेहा बोरा ने बांग्लादेश की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था- बांग्लादेश के युवाओं और उनके आंदोलन ने दुनिया भर के 'जेन-जी' (Gen-Z) को क्रांति और बदलाव का रास्ता दिखाया है। उन्होंने भारत और बांग्लादेश के युवाओं के संघर्ष को एक जैसा बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में लड़ाई लोकतंत्र, मताधिकार और धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ थी, और भारत के युवा भी आज इसी तरह की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बांग्लादेश के आंदोलनकारियों को लाल सलाम भी किया था।
राजनाथ सिंह का पलटवार
दिल्ली में जो पिछले दिनों घटनाक्रम हुए हैं, वे कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस और उनके सहयोगी संगठन प्रत्यक्ष रुप से और अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के बजाय अराजकता फैलाने का साधन बनाने में जुटे हैं। उन्हें मोहरा बनाने की कोशिश की जा रही है। बांग्लादेश की तर्ज पर रिजीम चेंज कराना चाहते हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहता है कि हमने बांग्लादेश से रिजीम चेंज कराने की प्रेरणा ली है। दूसरा खुले तौर पर सरकार को गिराने की बात करता है।
राजनाथ ने कहा- ये दिखाता है कि इनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। रिजीम चेंज जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनकी लड़ाई चुनाव सुधार के लिए नहीं है, न SIR के खिलाफ नहीं है, न ये लड़ाई ज्ञानेश कुमार के लिए है। ये लड़ाई देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करने की है।
रक्षा मंत्री ने कहा- राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को समझना चाहिए कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने और संवैधानिक संस्थाओं की साख पर चोट करने या भारत की विकास यात्रा में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की कल की टिप्पणी भी इसी ओर संकेत है। कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कानून का सम्मान करना जरूरी है। संवैधानिक संस्थाओं की बलि राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं चढ़ाई जा सकती।

