पत्नी Vodafone के Pug की तरह पति के पीछे नहीं चल सकती: मद्रास हाईकोर्ट का दिलचस्प स्टेटमेंट, कहा- वाइफ की अपनी नौकरी या जिम्मेदारियां भी हो सकती हैं
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तमिलनाडु की एक फैमिली कोर्ट ने 12 साल पहले पति की तलाक की अपील को खारिज करते हुए कहा था कि पति की जिम्मेदारी है कि पत्नी को हमेशा अपने साथ रखे। मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के इसी टिप्पणी के ठीक उलट स्टेटमेंट दिया है। (तस्वीर AI जनरेटेड है)
नेशनल डेस्क। मद्रास हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में बेहद दिलचस्प टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह हर हाल में पति के साथ ही रहे या उसके पीछे-पीछे चलती रहे। कोर्ट ने इसके लिए Vodafone के पुराने और मशहूर 'pug' एड का उदाहरण दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि पति नौकरी के लिए दूसरी जगह जाता है तो यह जरूरी नहीं कि पत्नी भी उसके साथ चली जाए। पत्नी की अपनी नौकरी या दूसरी जिम्मेदारियां हो सकती हैं। कोर्ट ने इसी मामले में 16 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी का रिश्ता खत्म करते हुए तलाक की मंजूरी दे दी।
यह फैसला जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमथी की बेंच ने 19 अगस्त को सुनाया था। इसका आदेश 31 अगस्त को सार्वजनिक हुआ।
बेंच का यह फैसला फैमिली कोर्ट के उस फैसले के ठीक उलट रहा, जिसमें कोर्ट ने तलाक को नामंजूर करते हुए पति को कहा था कि उन्हें पत्नी को अपने साथ ले जाना चाहिए था।
पति मुंबई में नौकरी करने गया, 16 साल से अलग रह रहे थे
कपल ने 10 सितंबर 1992 को हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। दोनों के चार बच्चे भी हैं। बाद में पति नौकरी के सिलसिले में मुंबई चला गया। इसके बाद दोनों अलग रहने लगे। करीब 16 साल तक अलग रहने के बाद पति ने 2014 में फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई।
पति ने पत्नी पर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध होने का आरोप लगाया था। लेकिन फैमिली कोर्ट ने तलाक देने से इनकार कर दिया।
फैमिली कोर्ट ने कहा था- पत्नी को साथ रखना पति की जिम्मेदारी
फैमिली कोर्ट का कहना था कि पति अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरी जगह नौकरी करने चला गया और अब इसी वजह से पैदा हुई स्थिति का फायदा उठाकर तलाक नहीं मांग सकता।
कोर्ट ने यहां तक कहा था कि पति की जिम्मेदारी है कि वह जहां भी जाए, पत्नी को अपने साथ रखे। कोर्ट के मुताबिक, अगर पति पत्नी को साथ नहीं रखता है तो इससे गलत रिश्ते या ऐसे रिश्तों की अफवाह की स्थिति पैदा हो सकती है। फैमिली कोर्ट के इसी फैसले को पति ने मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

HC ने कहा- पत्नी कोई 'pug' नहीं, जो पति के पीछे चलती रहे
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट की सोच से सहमति नहीं जताई। बेंच ने कहा कि हर स्थिति में पति-पत्नी का साथ रहना संभव नहीं होता।
कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर पति सैनिक है तो वह पत्नी को सेना की बैरक में नहीं रख सकता। इसी तरह पत्नी नौकरी करती हो तो उससे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह नौकरी छोड़कर पति के साथ चली जाए।
इसी बात को समझाने के लिए कोर्ट ने Vodafone के पुराने एड के pug का उदाहरण दिया। बेंच ने कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह 'Vodafone के उस मशहूर pug' की तरह पति के पीछे-पीछे चलती रहे।
हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
हाईकोर्ट ने माना कि दोनों के बीच रिश्ता काफी पहले ही टूट चुका है और अब इसे बचाने की कोई उम्मीद नहीं है।
बेंच ने कहा कि दोनों तरफ से एक-दूसरे पर लगाए गए आरोप-प्रत्यारोप को देखते हुए पता चलता है कि इनके बीच काफी कड़वाहट है। ऐसे में दोनों के दोबारा साथ आने की कोई संभावना नहीं दिखती। बेंच ने आगे कहा कि इतने लंबे समय तक अलग रहने के कारण यह शादी पूरी तरह टूट चुकी है।
ऐसे में कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी। हालांकि, तलाक तभी लागू होगा जब पति अपनी पत्नी को 7 लाख रुपए गुजारा भत्ता के तौर पर देगा।
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