LeT कमांडर हाशिम मूसा के मारे जाने के मायने क्या हैं: कश्मीर में लश्कर का नेटवर्क कितना बचा, सुरक्षा बलों के लिए अब नई चुनौती क्या
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जांच एजंसियों के मुताबिक, मूसा असल में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का रहने वाला था। उसके पिता पाकिस्तानी आर्मी में रह चुके हैं। यह भी दावे हैं कि मूसा ने पाकिस्तान में फॉर्मल मिलिट्री ट्रेनिंग या एलिट स्पेशल सर्विसेस ग्रुप (SSG) कमांडो ट्रेनिंग ली हुई थी।
नेशनल डेस्क। जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के नेटवर्क को एक और बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान के आतंकी हाशिम मूसा को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर के मोस्ट वांटेड पाकिस्तानी आतंकियों में मूसा शामिल था।
मूसा के एनकाउंटर को कश्मीर घाटी से आतंक का सफाया करने की डायरेक्शन में बड़ा अचीवमेंट माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका ग्रुप पीर पंजाल के दोनों ओर यानी जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी के बीच काम कर रहा था। वह इलाके में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों के छोटे ग्रुप को संभाल रहा था और पाकिस्तानी हैंडलर्स से मिले प्लान को कश्मीर में एग्जीक्यूट करने का काम भी करता था।
पिछले साल पहलगाम टेररिस्ट अटैक में भी उसका हाथ था। अब उसके मारे जाने से लश्कर के लिए आतंकियों की आवाजाही, भर्ती, हथियार-रसद और हमलों की प्लानिंग को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
10 साल में कैसे कमजोर हुआ लश्कर का स्थानीय नेटवर्क
लश्कर-ए-तैयबा का जम्मू-कश्मीर में नेटवर्क पिछले कुछ सालों में काफी कमजोर हुआ है। 2010 के आसपास लश्कर के पास घाटी के कई इलाकों में लोकल कमांडर, बड़ी संख्या में हथियारबंद आतंकी और मजबूत स्थानीय नेटवर्क था।
अबू कासिम, अबू दुजाना, अबू इस्माइल और बशीर लश्करी जैसे कमांडरों के मारे जाने के बाद संगठन का यह ढांचा धीरे-धीरे कमजोर होता गया।
पहले लश्कर के लोकल कमांडर अपने साथ कई आतंकियों का ग्रुप रखते थे और लंबे वक्त तक किसी इलाके में सक्रिय रह सकते थे। अब ऐसा नेटवर्क न के बराबर है।
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लेकिन लश्कर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
मीडिया रिपोर्ट्स में सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से लिखा जाता रहा है लश्कर का लोकल नेटवर्क कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन संगठन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स, घुसपैठ और सीमा पार से मिलने वाली मदद इसे जिंदा रखे हुए है।
पाकिस्तानी आतंकियों के ग्रुप को जम्मू-कश्मीर में भेजना, उन्हें स्थानीय स्तर पर मदद दिलाना और सीमा पार बैठे हैंडलर्स से संपर्क बनाए रखने का नेटवर्क ध्वस्त करना अभी भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती है।
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अब लश्कर का नेटवर्क कैसा है?
मूसा के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में लश्कर की मौजूदा स्थिति को मोटे तौर पर ऐसे समझा जा सकता है...
- लोकल कमांडरों का पुराना बड़ा नेटवर्क बेहद कमजोर हुआ है।
- बड़े स्थानीय आतंकी ग्रुप पहले की तुलना में छोटे हुए हैं।
- लोकल टेररिस्ट अब पाकिस्तानी आकाओं पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं।
- पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और कमांडरों की भूमिका अब भी बनी हुई है।
- घुसपैठ के रास्ते, सीमा पार संपर्क और हथियारों की डिलीवरी अब भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती हैं।
- छोटे ग्रुप बनाकर आतंकियों को लंबे समय तक छिपाए रखने और हमले कराने की कोशिश की जा रही है।

