1947 विभाजन: कैसे हुआ था इंडियन ब्रिटिश आर्मी का बंटवारा, भारत और पाकिस्तान... किसे कितने सैनिक-हथियार मिले
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सेना का बंटवारा लगभग 2:1 (64% भारत और 36% पाकिस्तान) के अनुपात में किया गया था। (ai इमेज)
नेशनल डेस्क. भारत 15 अगस्त को आजाद हुआ था। लेकिन इस आजादी से पहले भारत को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। 14 अगस्त को भारत दो स्वतंत्र देशों में बंट गया- भारत और पाकिस्तान। पाकिस्तान को आधिकारिक रूप से 14 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली, जबकि भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता हुआ। देश का यह बंटवारा धार्मिक आधार पर हुआ था। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को पाकिस्तान और हिंदू-बहुल क्षेत्रों को भारत में शामिल किया गया।
देश के बंटवारे के साथ-साथ संपत्ति, संसाधनों से लेकर सेना तक का बंटवारा हुआ। आईए जानते हैं कि 1947 में भारत-पाकिस्तान के लिए सेना का बंटवारा कैसे हुआ?
इंडियन आर्मी का इतिहास
1858 से 1895 तक इंडियन ब्रिटिश आर्मी 3 प्रेसीडेंसी में डिवाइड थी। बंगाल आर्मी, मद्रास आर्मी और बॉम्बे आर्मी। 1 अप्रैल 1895 में इंडियन आर्मी का गठन किया गया था। इस दिन अलग-अलग प्रेसीडेंसी की सेनाओं को मिलाकर भारतीय सेना बनाई गई थी। उस समय इंडियन आर्मी के 8 डिवीजन थे। पेशावर, रावलपिंडी, क्वाटा, लाहौर, मऊ, पूना, मेरठ और लखनऊ। 1903 में लॉर्ड किचनर इंडियन ब्रिटिश आर्मी के कमांडर इन चीफ बनाए गए थे।
इंडियन ब्रिटिश आर्मी की ट्रेनिंग रॉयल मिलिट्री कॉलेज सेंटबर्स इंग्लैंड में होती थी। इसके बाद 1932 में देहरादून में ही इंडियन मिलिट्री कॉलेज अकादमी खोली गई। जहां भारतीय आर्मी ऑफिसर्स की ट्रेनिंग होने लगी।
ये तस्वीर IMA के पहले बैच की है। जिसे 'पायनियर बैच' भी कहा जाता है। जिसमें 40 कैडेट में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और केएम करियप्पा भी हैं।
सेकंड वर्ल्ड वॉर में 25 लाख भारतीय सैनिक थे
पहले विश्व युद्ध में करीब डेढ़ मिलियन भारतीय सैनिकों ने अलग-अलग जगह लड़ाईंया लड़ीं। भारतीय सैनिकों की बहादुरी को देखते हुए उन्हें आर्मी में अफसर बनाया जाने लगा। दूसरे वर्ल्ड वॉर तक इंडियन आर्मी में 25 लाख से अधिक सैनिक हो गए थे।

धर्म के आधार पर हुआ सैनिकों का बंटवारा
'फ्रीडम एट मिडनाइट' बुक में लैरी कोलिन और डोमिनिक लेपियर लिखते हैं कि जिन्ना ने लार्ड माउंटबेटन से कहा कि उन्हें 15 अगस्त से पहले पाकिस्तान में अपनी सेना चाहिए। इसके लिए इंडियंस इंडिपेडेंट एक्ट में 3 प्रावधान किए गए। 7 जून 1947 के दिन एक पार्टिशन कमेटी बनाई गई। जिसमें भारत और पाकिस्तान की ओर से 2-2 लोगों को शामिल किया गया था। इस कमेटी ने तय किया की आर्मी का विभाजन 2 फेज में किया जाएगा। पहले फेज में धर्म के आधार पर विभाजन होगा। दूसरे फेज में सैनिक खुद अपने हिसाब से भारत-पाकिस्तान की सेना ज्वाइन कर सकते थे।
भारतीय सेना में 2 प्रतिशत मुस्लिम थे
विभाजन के समय भारतीय सेना में 30 से 35 प्रतिशत मुस्लिम थे। इनमें से 2 प्रतिशत मुस्लिम सैनिक भारत के साथ रहे बाकि पाकिस्तानी सेना में चले गए। फ्रंटलाइन के आर्टिकल के मुताबिक, उस समय 215 मुस्लिम कमीशन्ड ऑफिसर और 339 जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर भारतीय सेना में ही रहे।
विभाजन के समय भारत को 2 तिहाई सैनिक मिले थे। पाकिस्तान को एक तिहाई सेना दी गई। भारत को 2 लाख 60 हजार सैनिक मिले जबकि पाकिस्तान को 1 लाख 40 हजार सैनिक मिले थे। गोरखा रेजिमेंट को भारत और ब्रिटेन के बीच बांटा गया था।
ब्रिटिश मिलिट्री रिपोर्ट के अनुसार उस समय रॉयल ब्रिटिश इंडियन एयरफोर्स के पास 13 हजार जवान थे। जिनमें 10 हजार भारत को मिले और 3 हजार पाकिस्तान को दिए गए थे। नौसेना में 8700 जवाने थे। 3 हजार जवान पाकिस्तान चले गए थे। भारत के पास 5700 जवान थे।

पाकिस्तान की आर्थिक मदद के लिए धरने पर बैठे गांधी
अंग्रेजों ने इंडिया में हथियारों की 16 फैक्ट्री बनाई थीं। जो भारत के कंट्रोल में थी। ये सब पाकिस्तान को नहीं मिल सकती थी। इसके बदले में पाकिस्तान को एक अमाउंट देना तय किया गया। जिससे पाकिस्तान भी अपने यहां हथियारों की फैक्ट्री बना सके। द वायर के अनुसार, ये अमाउंट भारत को किस्तों में देना था लेकिन जम्मू-कश्मीर में कबायलियों के हमले के बाद गृहमंत्री सरदार पटेल ने इस अमाउंट को रोक दिया। महात्मा गांधी धरने पर बैठ गए। उन्होंने पाकिस्तान को पैसे देने की मांग की। तब भारत सरकार ने बचे हुए 55 करोड़ रुपये पाकिस्तान को दिए थे।
पाकिस्तानी अखबार द डॉन के अनुसार पाकिस्तान को सबसे ज्यादा नुकसान आर्मी के ट्रेनिंग सेंटर को लेकर हुआ था। उस समय ज्यादातर ट्रेनिंग सेंटर भारत में थे। पाकिस्तान के हिस्से में केवल 6 सेंटर्स आए थे।
इंडियन ब्रिटिश आर्मी का ये आखिरी आदेश था। आर्डर पर फील्ड मार्शल सर क्लाउड औचिनलेक और मेजर जनरल रेजिनाल्ड सेवरी के साइन हैं।
नौसेना का बंटवारा
भारत को सतलुज, कावेरी, जमुना और कृष्णा जहाज मिले। साथ ही खुखरी और तीर युद्धपोत भी मिले। इन सबके अलावा भारत को नासिक, कोलकाता, कोचीन और अमृतसर नाम के जलपोत और 4 जल मोटर माइन स्वीपर भी मिले। भारत को 4 बंदरगाह रक्षक मोटर लॉन्चर भी मिले थे।

