हिमाचल में सेब ढोने के लिए मोनोरेल: 500 किलो वजन उठाएगी; लागत ₹4.20 लाख
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किसान ने मोनोरेल को चाइना से इम्पोर्ट किया गया है, उसकी लागत करीब 4.20 लाख रुपए आई है।
नेशनल डेस्क. हिमाचल प्रदेश में अब सेब के बागानों के बीच माल ढोने के लिए मोनोरेल लगाई जाएगी। मंडी में मोनोरेल का 300 मीटर ट्रैक का सफल ट्रायल किया गया है। वहीं शिमला जिले के कोटखाई में किसान सुनील चौहान ने सेब बागान में पेट्रोल से चलने वाली मोनोरेल लगाई है। यह 500 किलो वजन उठा सकती है और 45 डिग्री की ढलान पर भी चलती है।
मोनोरेल में एप्पल बॉक्स, क्रेट, खाद, फर्टिलाइजर, टूल्स और खेती का सभी सामान ट्रांसपोर्ट किया जा सकेगा। किसान चौहान ने कहा- 2 दिन पहले ही इस मोनोरेल का ट्रायल रन शुरु किया है। अभी आसपास के कई किसान इस मोनोरेल को देखने के लिए आ रहे हैं।
45 डिग्री ढलान में काम करेगा
यह मोनोरेल सेब के बागानों में बिछाए गए ट्रैक पर चलता है। साथ ही 45 डिग्री ढलान पर भी यह आसानी से चढ़ जाता है। किसान ने कहा- अभी इसका ट्रायल रन किया जा रहा है, अभी तक यह सिस्टम अच्छा चल रहा है। चौहान ने इस मोनोरेल का चाइना से इंपोर्ट किया है। इस लागत करीब ₹4.20 लाख आई है। हिमाचल प्रदेश में मशीनीकरण का महत्व बढ़ता जा रहा है। जहां ज्यादातर किसान मजदूरों पर निर्भर हैं। इनमें नेपाल के मजदूर भी शामिल हैं।
चौहान ने कहा- अभी तक 100 मीटर ट्रैक बिछाया गया है और इसे 200 मीटर और बढ़ाया जाएगा। इससे मजदूरों पर निर्भरता लगभग कम हो जाएगी।
मंडी में भी सफल ट्रायल
मंडी के सुंदरनगर में भी इस तरह की मोनोरेल का 300 मीटर सफल ट्रायल किया गया है, वहां 1 किमी तक का ट्रैक बिछाने की प्लानिंग है। मंडी के किसान संजय सकलानी ने बताया, इस मोनोरेल से सेब की फसल बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। सेब डैमेज नहीं होगा तो उसके अच्छे दाम मिलेंगे।
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मोनोरेल इक्विपमेंट डिस्ट्रीब्यूटर्स तेजेंदर सैनी इस प्रोजेक्ट काम करना अलग तरह का अनुभव है, यह इंडिया का पहला प्रोजेक्ट है। इसकी पूरी लागत करीब 20 लाख रुपए तक आएगी। क्योंकि अभी यह पायलट प्रोजेक्ट है, इसलिए इसकी लागत ज्यादा आएगी।

