परिसीमन बिल फिर से लाएगी सरकार: इसी महीने संसद का स्पेशल सेशन बुलाने की तैयारी! DMK समेत छोटे दलों को मनाने में जुटी BJP
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महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा बिल अप्रैल में लोकसभा में गिर गया था। अब सरकार नए सिरे से इसे पास कराने की तैयारी कर रही है। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। चुनाव आयोग और चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध के बीच केंद्र सरकार संसद का स्पेशल सेशन बुलाने की तैयारी कर रही है। सरकार इसी महीने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिलों को फिर से संसद में पेश कर सकती है।
NDTV ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सरकार को इस बार सदन में जरूरी समर्थन जुटने का भरोसा है। खास बात यह है कि सरकार इन बिलों को पास कराने के लिए DMK से भी बातचीत कर रही है। पार्टी के लोकसभा में 22 सांसद हैं और वह अब तक परिसीमन का विरोध करती रही है। तमिलनाडु चुनाव के बाद DMK और कांग्रेस के रिश्ते टूटने के बाद सरकार को उससे समर्थन मिलने की उम्मीद है। सरकार कुछ छोटे दलों से भी संपर्क में है।
अप्रैल में गिरा था बिल, अब दोबारा तैयारी
सरकार ने महिला आरक्षण को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में बदलाव यानी परिसीमन से जोड़ते हुए संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया था। बजट सत्र में यह लोकसभा से पास नहीं हो सका। यह पहली बार था जब संसद में मोदी सरकार का कोई बिल गिरा था।
दरअसल, संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। मोदी सरकार के पास फिलहाल लोकसभा में यह आंकड़ा नहीं है। यही कारण है कि बिल पारित नहीं हो सका। अब सरकार इस बिल को दोबारा लाने की तैयारी में है।
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सरकार ने इससे पहले मानसून सत्र में भी इन बिलों को लाने की कोशिश की थी, लेकिन NEET पेपर लीक और स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष के हंगामे के बीच यह कोशिश आगे नहीं बढ़ सकी। दिलचस्प बात यह है कि 13 अगस्त को खत्म हुए संसद के मानसून सत्र को अब तक औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए ताकि बीच में कभी भी स्पेशल सेशन बुलाकर परिसीमन बिल पारित किया जा सके।
DMK और छोटे दलों पर सरकार की नजर
परिसीमन के मुद्दे पर सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जरूरी सांसदों का समर्थन जुटाना है। NDTV के सूत्रों के मुताबिक, सरकार DMK के अलावा कुछ छोटे दलों से भी बातचीत कर रही है।
DMK के पास लोकसभा में 22 सांसद हैं। पार्टी परिसीमन का विरोध करती रही है, क्योंकि उसे डर है कि सीटों के बंटवारे में दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा, सरकार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP (SP) से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। पार्टी के पास लोकसभा में 8 सांसद हैं। सीटों में सभी राज्यों के लिए 50% की गारंटीड बढ़ोतरी का भरोसा मिलने पर पार्टी समर्थन के लिए तैयार हो सकती है। पार्टी नेता सुप्रिया सुले पहले भी कह चुकी हैं कि 50% बढ़ोतरी की गारंटी मिलने पर बातचीत की जा सकती है।
क्या सरकार के पास बिल पास कराने के लिए जरूरी नंबर है?
संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में विशेष बहुमत चाहिए। इसका मतलब है कि वोटिंग के दौरान मौजूद और वोट देने वाले सांसदों में से कम से कम दो-तिहाई का समर्थन जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार को लगता है कि पिछली बार के मुकाबले उसकी स्थिति बेहतर हुई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 और शिवसेना (UBT) के 6 सांसद अब सत्तापक्ष के साथ आ गए हैं।
लोकसभा में मौजूदा 540 सदस्यों के आंकड़े के आधार पर दो-तिहाई का आंकड़ा 360 के आसपास बैठता है। NDA के पास 292 सांसदों की संख्या थी। इसमें शिवसेना और TMC के बागी सांसदों को मिला लिया जाए तो यह आंकड़ा 318 हो जाता है।
अगर DMK और NCP(SP) भी साथ आ जाए तो यह संख्या 348 पर पहुंचती है। यानी मोदी सरकार अभी भी नंबर गेम में थोड़ी पीछे है। इसलिए सरकार कुछ छोटे दलों और रीजनल पार्टियों से भी बातचीत कर रही है। असल जरूरत वोटिंग के वक्त मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों की संख्या पर निर्भर करती है, यह भी सरकार के लिए एक प्लस पॉइंट है।

