स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट से HAL बाहर क्यों हुई: डिफेंस सेक्रेटरी ने बताई वजह; अब रेस में हैं तीन प्राइवेट कंपनियां
Published: Updated:
4 min read

बेंगलुरु के येलहंका एयरबेस में ‘एयरो इंडिया 2025’ एयर शो के दौरान भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोटोटाइप को रखा गया था। (फोटो सोर्स: Reuters)
नेशनल डेस्क। भारत के AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट से HAL के बाहर होने के कारणों का खुलासा हो गया है। डिफेंस सेक्रेटरी आरके सिंह ने बताया है कि कुछ तकनीकी स्टैंडर्ड्स पर खरे नहीं उतरे के कारण HAL इस रेस से बाहर हुई।
फरवरी 2026 में यह रिपोर्ट आई थी कि AMCA के प्रोटोटाइप बनाने में रुचि दिखाने वाली 7 कंसोर्टियम (साझेदार कंपनियों) में से सिर्फ 3 ही जरूरी तकनीकी और फाइनेंशियल शर्तें पूरी कर पाए थे। HAL ने दो छोटी कंपनियों के साथ मिलकर बोली लगाई थी, लेकिन वह क्वालिफाई नहीं कर पाई थी। अब डिफेंस सेक्रेटरी ने यह साफ कर दिया कि यही कारण था, जिसके चलते HAL इस प्रोजेक्ट से बाहर हुई।
आरके सिंह क्या बोले?
नई दिल्ली में रविवार (27 सितंबर) को एक डिफेंस समिट में आरके सिंह ने बताया HAL कुछ ऐसी रूटीन तकनीकी शर्तें पूरी नहीं कर पाया, जिन्हें पूरा करना जरूरी था। यानी कंपनी किसी बहुत बड़ी या असाधारण तकनीकी की वजह से नहीं, बल्कि कुछ जरूरी तकनीकी स्टैंडर्ड को पूरा नहीं कर पाने के कारण बाहर हुई। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये तकनीकी शर्तें क्या थीं।
हालांकि डिफेंस सेक्रेटरी ने यह भी कहा कि सरकार AMCA के लिए सिर्फ सरकारी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। सरकार चाहती है कि देश में फाइटर जेट बनाने की दूसरी प्रोडक्शन लाइन भी तैयार हो।
उन्होंने बताया कि अब तक देश में फाइटर जेट बनाने का काम काफी हद तक एक ही सरकारी सिस्टम पर निर्भर रहा है। सरकार चाहती है कि प्राइवेट सेक्टर भी इस काम में आगे आए।

फिलहाल तीन कंपनियां/कंसोर्टियम AMCA के प्रोटोटाइप बनाने की रेस में हैं
- Tata Advanced Systems Limited (TASL)
- L&T-BEL-Dynamatic Consortium
- Bharat Forge-BEML-Data Patterns Consortium
मई के आखिर में Aeronautical Development Agency (ADA) ने इन शॉर्टलिस्टेड कंपनियों को RFP जारी किया था। इसमें कंपनियों से प्रोजेक्ट की तकनीकी और कमर्शियल जानकारी के साथ प्रोजेक्ट की कीमत भी बताने को कहा गया है।
सरकार 15 हजार करोड़ रुपए देगी
AMCA के प्रोटोटाइप फेज पर करीब 15,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी। चुनी जाने वाली कंपनी को ADA के साथ मिलकर 5 प्रोटोटाइप और 1 स्ट्रक्चरल टेस्ट एयरक्राफ्ट बनाना होगा। इसके लिए उसे 3 महीने के अंदर एक नई कंपनी भी बनानी होगी।
प्लान के मुताबिक, पहला AMCA प्रोटोटाइप करीब 30 महीने में पहली उड़ान भर सकता है। सभी 5 प्रोटोटाइप 64 महीने में तैयार करने का टारगेट रखा गया है। इन विमानों से 84 महीने में करीब 1,800 टेस्ट फ्लाइट कराने की योजना है।
पहला AMCA सितंबर 2028 में उड़ सकता है
डिफेंस सेक्रेटरी आरके सिंह ने उम्मीद जताई है कि AMCA का पहला प्रोटोटाइप सितंबर 2028 में पहली उड़ान भर सकता है।
शुरुआती AMCA प्रोटोटाइप में अमेरिका की General Electric (GE) का F414 इंजन इस्तेमाल होगा। यही इंजन भारत के Tejas Mk-2 में भी इस्तेमाल किया जाना है।
AMCA का डिजाइन अधिकार ADA के पास रहेगा। यानी विमान के डिजाइन और इससे जुड़े अहम फैसलों पर सरकारी संस्था की मुख्य भूमिका होगी।
भारत के पास अभी कोई स्टील्थ फाइटर जेट नहीं
AMCA भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल अपना कोई रडार से बच निकलने वाला स्टील्थ फाइटर जेट नहीं है।
इसके मुकाबले चीन के पास J-20 और J-35 जैसे स्टील्थ फाइटर हैं। चीन के पास 500 से ज्यादा स्टील्थ फाइटर शामिल होने की रिपोर्ट सामने आती रही है। J-35 को पाकिस्तान एयरफोर्स में शामिल किए जाने की भी चर्चा है।
भारत फिलहाल सीमित संख्या में रूस के Su-57 स्टील्थ फाइटर खरीदने के विकल्प पर विचार कर रहा है।
यह भी पढ़ें...

