UN में पाकिस्तान के प्रपोजल पर भारत-इजराइल का विरोध: आर्म्स कंट्रोल प्रपोजल के खिलाफ वोट किया, 180 देशों ने सपोर्ट किया
Published:
3 min read

यूनाइटेड नेशंस में भारत के परमानेंट मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी अनमोल शेर बेदी ने देश का पक्ष रखा।- फाइल फोटो
इंटरनेशनल डेस्क। यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) की फर्स्ट कमेटी में पाकिस्तान और बेलारूस ने रीजनल कन्वेंशनल आर्म्स कंट्रोल (Conventional Arms Control) को लेकर प्रपोजल पेश किया। इस पर भारत और इजराइल ने स्ट्रॉन्ग स्टैंड लिया । 193 मेंबर्स वाली यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में भारत और इजराइल ही ऐसे दो देश थे, जिन्होंने इस प्रपोजल के खिलाफ वोट किया।
इस ड्राफ्ट रेजोल्यूशन का टाइटल जनरल एंड कम्प्लीट डिसआर्मामेंट कन्वेंशनल आर्म्स कंट्रोल एट द रीजनल एंड सबरीजनल लेवल्स था। वोटिंग में 180 देशों ने इसके समर्थन में वोट किया। किसी भी देश ने वोटिंग से दूरी नहीं बनाई।
प्रपोजल को समर्थन मिलने के बावजूद भारत और इजराइल ने इसके खिलाफ वोट किया। दोनों देशों के इस स्टैंड ने उनकी सिक्योरिटी प्रायोरिटीज और स्ट्रैटेजिक पॉलिसी को लेकर चर्चा छेड़ दी।
भारत का क्लियर स्टैंड
यूनाइटेड नेशंस में भारत के परमानेंट मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी अनमोल शेर बेदी ने भारत के वोट न देने की वजह बताते हुए पाकिस्तान के नैरेटिव पर सवाल उठाए। भारत ने पूछा कि जब UN डिसआर्मामेंट कमीशन (UNDC) 1993, 1999 और 2017 में इस मुद्दे पर पहले ही यूनैनिमस एग्रीमेंट ने फैसला दे चुका है, तो फिर इसे दोबारा चर्चा में लाने की क्या जरूरत है? भारत ने प्रस्ताव में साउथ एशिया को लेकर जोड़े गए खास संदर्भों का भी विरोध किया।
भारत ने कहा कि कन्वेंशनल आर्म्स कंट्रोल एक ग्लोबल मुद्दा है। इसे सिर्फ रीजनल या सब-रीजनल दायरे तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह प्रपोजल मानकर चलता है कि देशों की सिक्योरिटी चिंताएं उनकी रीजनल बॉर्डर पर ही खत्म हो जाती हैं। जबकि ऐसा नहीं है। क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म और दूसरे खतरे किसी भी देश की नेशनल सिक्योरिटी को प्रभावित कर सकते हैं। भारत ने प्रपोजल में साउथ एशिया से जुड़े खास पॉइंट्स को शामिल करने पर भी आपत्ति जताई।
पाकिस्तान ने जताई खुशी
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपने तीनों प्रपोजल पास होने पर खुशी जताई। इन प्रस्तावों में न्यूक्लियर सिक्योरिटी और रीजनल ट्रस्ट बिल्डिंग से जुड़े मुद्दे शामिल थे। पाकिस्तान का कहना है कि बढ़ते ग्लोबल टेंशन और साउथ एशिया में बिगड़ते सिक्योरिटी हालात के बीच पाकिस्तान ने इन प्रपोजल को पीस और स्टेबिलिटी के लिए जरूरी बताया।
डिप्लोमैटिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान लंबे समय से UN में ऐसे प्रपोजल पेश करता रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके जरिए पाकिस्तान साउथ एशिया में भारत की मिलिट्री कैपेबिलिटीज को सीमित करना चाहता है। साथ ही, भारत को रीजनल दायरे तक बांधने की कोशिश करता है।
भारत-इजराइल की साझा सिक्योरिटी अप्रोच
इस वोटिंग में 180 देशों ने प्रपोजल का समर्थन किया। इसके बावजूद भारत और इजराइल ने एक साथ इसके खिलाफ वोट किया। दोनों देशों का यह स्टैंड इंटरनेशनल लेवल पर उनके स्ट्रॉन्ग जियोपॉलिटिकल कोऑर्डिनेशन को दिखाता है।
भारत और इजराइल, दोनों ही क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म, प्रॉक्सी वॉर और अपनी-अपनी रीजनल सिक्योरिटी से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। दोनों देशों ने साफ कर दिया कि वे ऐसे किसी भी प्रपोजल को स्वीकार नहीं करेंगे, जो उनकी नेशनल डिफेंस और सिक्योरिटी को किसी तय रीजनल दायरे तक सीमित करने की कोशिश करे।

