अब्दुल अल-सईद US मिडटर्म इलेक्शन जीते: मैसूर के एक्स मिनिस्टर से खास कनेक्शन, जानें US हिस्ट्री के पहले मुस्लिम सीनेटर कौन
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अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन से अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीत गए हैं। वह अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर होंगे।- फाइल फोटो
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन से सीनेट का इलेक्शन जीत लिया है। उन्होंने रिपब्लिकन कैंडिडेट और पूर्व सांसद माइक रोजर्स को हराया। इस जीत के साथ 42 साल के अल-सईद अमेरिका की हिस्ट्री में पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं।
इस इलेक्शन का भारत के कर्नाटक से भी खास कनेक्शन है। अल-सईद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकु का परिवार कर्नाटक के भटकल शहर से ताल्लुक रखता है। उनके नाना जुकाकु शमशुद्दीन मैसूर राज्य में मंत्री रह चुके हैं। आइए जानते हैं कौन हैं अब्दुल अल-सईद
गैरी पीटर्स की जगह सीनेट जाएंगे सईद
मिशिगन की यह सीट रिपब्लिकन-डेमोेक्रेट्स दोनों के लिए अहम मानी जा रही थी। यहां से जीतने वाले कैंडिडेट रिटायर हो रहे डेमोक्रेटिक सांसद गैरी पीटर्स की जगह सीनेट में जाएंगे। अल-सईद ने माइक रोजर्स को हराया। रोजर्स को प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प का सपोर्ट हासिल था।
इलेक्शन के दौरान धर्म को लेकर टारगेट किए गए
इलेक्शन के दौरान रिपब्लिकन लीडर्स ने अल-सईद के मुस्लिम होने और उनके आइडियोलॉजी को मुद्दा बनाया। ट्रम्प ने भी उन पर कई बार निशाना साधा। अल-सईद ने इन हमलों का जवाब देते हुए महंगाई, रोजगार और आम लोगों के खर्च जैसे मुद्दों पर इलेक्शन लड़ा।
इलेक्शन कैंपेन में उठाया लोगों से जुड़ा मुद्दा
अल-सईद ने अपने इलेक्शन कैंपेन में सभी लोगों को हेल्थकेयर सुविधा देने, बड़े कारोबारियों के पॉलिटिकल इनफ्यूएंस को कम करने और आम परिवारों का खर्च घटाने जैसे मुद्दे उठाए थे। उन्होंने मेडिकेयर फॉर ऑल स्कीम को भी सपोर्ट किया
अल-सईद को करीब 52% वोट मिले, जबकि रोजर्स को लगभग 46% वोट हासिल हुए। अल-सईद की जीत के साथ डेमोक्रेट्स ने मिशिगन की यह सीट अपने पास बरकरार रखी है। सीनेट इलेक्शन में उनकी जीत को पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े के लिए भी अहम माना जा रहा है।
अब इस जीत का कर्नाटक कनेक्शन समझिए
सईद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकु पेशे से साइकॉलॉजिस्ट हैं। उनकी फैमिली कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल से जुड़ा है। सारा के दादा जुकाकु शमशुद्दीन तत्कालीन मैसूर राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री बीडी जत्ती के टेन्योर में फाइनेंस डिपार्टमेंट डिप्टी मिनिस्टर रह चुके हैं।
उस समय मैसूर राज्य का नाम बाद में बदलकर कर्नाटक रखा गया। शमशुद्दीन भटकल के जाने-माने वकील और लीडर थे। परिवार के मुताबिक, उन्होंने शहर में बिजली पहुंचाने और इसके डेवलपमेंट के लिए भी बहुत काम किया था।
कैसे हुई सईद और सारा की मुलाकात
सारा के पिता डॉ. तैयब जुकाकु ने बेंगलुरु से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। इसके बाद वह अमेरिका चले गए और वहां डॉक्टर के तौर पर काम करने लगे। सारा का जन्म और परवरिश अमेरिका के मिशिगन में हुई। सईद से उनकी मुलाकात मिशिगन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई थी।
इसके बाद दोनों ने शादी की। सारा के परिवार के कई सदस्य अब भी बेंगलुरु में ही रहते हैं, जबकि उनके माता-पिता अमेरिका में बस गए। परिवार के लोग अल-सईद की इलेक्शन में जीत के बाद बेहद खुश हैं।
भारत से कनेक्शन का जिक्र कर चुके हैं सईद
अल-सईद कई बार पब्लिकली अपने इंडियन रूट्स का जिक्र कर चुके हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह करीब 20 साल से साउथ इंडियन फैमिली का हिस्सा हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अब वह खुद को अरब से ज्यादा भारतीय महसूस करते हैं।
2018 में मिशिगन गवर्नर का इलेक्शन हार गए थे
अल-सईद प्रोफेशन से डॉक्टर और पब्लिक हेल्थ अफसर रहे हैं। उन्होंने डेट्रॉइट के हेल्थ डिपार्टमेंट को लीड किया है। 2018 में उन्होंने मिशिगन के गवर्नर का इलेक्शन लड़ा था, लेकिन जीत नहीं सके थे। इस बार सीनेट इलेक्शन जीतकर उन्होंने अमेरिका की पॉलिटिक्स में एक नया इतिहास बना दिया है।
सईद की जीत अमेरिकन मुस्लिम कम्युनिट के लिए अहम
अल-सईद की जीत ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका में मुस्लिम कम्युनिटी के रिप्रेजेंटेशन और पॉलिटिक्स में उसकी भूमिका पर बहस चल रही है। इलेक्शन प्रचार के दौरान उनके धर्म और परिवार को टारगेट किया गया। रिपब्लिकन कैंडिडेट रोजर्स ने उन पर मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध होने के आरोप भी लगाए थे, लेकिन इन आरोपों को लेकर सबूत पेश नहीं किए गए।

