जिस पर भारत विरोधी एजेंडा फैलाने का आरोप, वह फिर से जीतीं: इलहान उमर 5वीं बार अमेरिकी संसद जाएंगी, BJP ने राहुल गांधी के साथ जोड़ा था नाम
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इलहान उमर 2018 से डेमोक्रेटिक पार्टी से सांसद चुनी जाती रही हैं। इस बार उन्होंने 75 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल कर रिपब्लिकन कैंडिडेट को हराया। (फोटो सोर्स: @IlhanMN)
नेशनल डेस्क। डेमोक्रेट सांसद इलहान उमर एक बार फिर अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के लिए चुनी गई हैं। उन्होंने मिनेसोटा की 5th कांग्रेशनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन नागेल को हराकर चुनाव जीता। यह लगातार 5वीं बार है, जब वह अमेरिकी संसद पहुंचेंगी।
यहां इलहान उमर का खास जिक्र इसलिए क्योंकि वह भारत में चर्चा का विषय रही हैं। उन्होंने अप्रैल 2022 में पाकिस्तान दौरा किया और फिर जून 2022 में अमेरिकी संसद में भारत से जुड़ा एक प्रस्ताव पेश किया था। तभी से उन पर भारत विरोधी होने का आरोप लगता रहा है।
हाल ही में BJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के आंदोलनों का कनेक्शन भी इलहान उमर से जोड़ा था। यहां तक कहा गया था कि राहुल गांधी विदेश में जाकर इलहान उमर जैसी भारत विरोधी ताकतों से मिलते हैं।
सबसे पहले इलहान का इंट्रोडक्शन
इलहान उमर मुल रूप से सोमालिया की रहने वाली हैं। वहां गृहयुद्ध से बचने के लिए उनका परिवार केन्या और फिर कुछ अन्य जगहों से होता हुआ 90 के दशक में अमेरिका आया। उनकी पढ़ाई अमेरिका में ही हुई। पढ़ाई के दौरान ही वह पॉलिटिक्स में एक्टिव हो गईं। नतीजा यह हुआ कि वह 2018 के राष्ट्रपति चुनाव में वह डेमोक्रेटिक पार्टी की कैंडिडेट बनी और जीत दर्ज कर अमेरिकी संसद पहुंची। वह अमेरिकी संसद पहुंचने वाली पहली दो मुस्लिम महिलाओं में से एक थीं।
अपने क्षेत्र में वह बेहद पापुलर हैं। इस बार भी उन्होंने 75 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल कर जीत दर्ज की। जीत के बाद उन्होंने मिनेसोटा की पब्लिक को थैंक्यू कहा। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रम्प उन्हें शांत नहीं कर सकते। दरअसल, इलहान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की बड़ी आलोचक रही हैं। ट्रम्प भी उन्हें अपने मूल देश (सोमालिया) जाने के लिए कहते रहे हैं।
भारत से क्या है कनेक्शन?
जून 2022 में इलहान उमर ने कुछ और डेमोक्रेटिक सांसदों के साथ अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव पेश किया। इसमें भारत का नाम country of particular concern यानी विशेष चिंता वाले देश की लिस्ट में डालने का आग्रह था। इसके पीछे इलहान उमर का कहना था कि भारत की वर्तमान सरकार में मुस्लिम, क्रिश्चन, दलित, आदिवासी और अन्य कल्चरल अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।
इलहान उमर ने अपने प्रस्ताव के पक्ष में धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया। तब भारत ने इलहान उमर के आरोपों और अमेरिका इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज किया था।
इससे दो महीने पहले वह 4 दिवसीय पाकिस्तान दौरे पर थीं। इस दौरान वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भी गईं। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा की निंदा करते हुए इसे भारत की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। इल्हान उमर ने आर्टिकल 370 हटने और भारत में CAA-NRC का भी विरोध किया था।

इलहान उमर के सहारे राहुल गांधी को भी घेरती रही है BJP
सितंबर 2024 में जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी अमेरिकी दौरे पर थे। तब उनसे मिलने वाले एक डेलिगेशन में इल्हान उमर भी थीं। BJP ने इसे लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला था। BJP ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ऐसे लोगों और ताकतों से मिल रहे हैं जो भारत विरोधी रुख रखती हैं और देश के बाहर भारत के खिलाफ एजेंडा चलाती हैं।
अब जब राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, तो BJP उन पर विदेशी ताकतों के साथ साजिश रचने का आरोप लगा रही है। इस साजिश में भी इलहान उमर का नाम लिया जा रहा है। पिछले महीने ही निशिकांत दुबे ने कहा था कि राहुल गांधी विदेश जाकर इलहान उमर जैसी भारत विरोधी ताकतों से क्यों मिलते हैं? क्या इन लोगों के साथ मिलकर देश तोड़ने की साजिश रची जा रही है?
कैसे रहे अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन के रिजल्ट?
मिडटर्म इलेक्शन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में बहुमत हासिल कर चुकी है। इस नतीजे को ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ जनता के गुस्से के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह ईरान के साथ जारी जंग, महंगाई और टैरिफ को लेकर अमेरिकी वोटरों में नाराजगी का नतीजा है।
अमेरिकी सीनेट में 100 सीट होती हैं। यहां 35 सीटों पर चुनाव हुए। 30 पर रिजल्ट आ चुके हैं। नतीजों के बाद सीनेट में डेमोक्रेट्स के पास 53 सीटें हो गई हैं। रिपब्लिकंस के पास 42 हैं। 5 पर नतीजे आने बाकी हैं। इसी तरह हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की 435 सीटों में डेमोक्रेट्स के खाते में 221 आ चुकी है। यानी यहां भी बहुमत का आंकड़ा (218) पार हो चुका है। रिपब्लिकंस यहां 130 पर अटक गए हैं। 84 सीटों पर काउंटिंग जारी है।
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