बलूचिस्तान में बिगड़ते हालात: 2025 में 1482 लोग गायब, 598 की हत्या, आरोप पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर; HRCB की रिपोर्ट में क्या-क्या
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तस्वीर दिसंबर 2018 की है। बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में बड़े और बच्चे अपने गायब रिश्तेदारों के फोटो वाले पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य में ऐसी तस्वीरें आम हैं। (फोटो सोर्स: AFP)
नेशनल डेस्क। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति साल 2025 में और खराब होने का दावा है। ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके में जबरन लोगों को गायब करने, हत्या और शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में इन घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों और उनसे जुड़े लोकल हथियारबंद समूहों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
1482 लोगों के गायब होने का दावा
HRCB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में बलूचिस्तान में 1482 लोगों के जबरन गायब किए जाने के मामले दर्ज हुए। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले करीब 79 फीसदी ज्यादा है। इन मामलों में सबसे ज्यादा आरोप फ्रंटियर कॉर्प्स पर लगे हैं। फ्रंटियर कॉर्प्स को 897 लोगों के जबरन गायब होने के मामलों से जोड़ा गया है।
598 हत्याएं, सुरक्षा बलों पर आरोप
रिपोर्ट में 2025 के दौरान बलूचिस्तान में 598 लोगों की हत्या की बात भी सामने आई। यह संख्या पिछले साल की तुलना में करीब 25 फीसदी ज्यादा बताई गई है। इन हत्याओं में से 325 मामले यानी करीब 54.3 फीसदी सुरक्षा बलों और स्टेट स्पॉन्सर्ड डेथ स्क्वॉड से जुड़े थे। 195 हत्याओं के लिए सीधे फ्रंटियर कॉर्प्स को जिम्मेदार बताया है।

बच्चे भी बने निशाना
रिपोर्ट में बच्चों के गायब होने और मारे जाने के मामलों का भी जिक्र है। HRCB के मुताबिक, 2025 में जबरन गायब किए गए लोगों में 108 नाबालिग शामिल थे। वहीं, 29 नाबालिगों की हत्या का दावा किया गया है।
यह आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई का असर सिर्फ राजनीतिक कार्यकर्ताओं या हथियारबंद समूहों तक सीमित नहीं है बल्कि आम परिवार और बच्चों तक भी पहुंचा है।
प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों पर भी कार्रवाई
HRCB ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बलूचिस्तान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों, पत्रकारों, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर भी दबाव बढ़ा है। इन लोगों को मनमाने तरीके से गिरफ्तार करने, कानूनी मामलों में फंसाने और शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर प्रदर्शन और लोगों की आवाजाही पर रोक लगाए जाने के भी उदाहरण दिए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आतंकवाद से जुड़े कानूनों का इस्तेमाल ऐसे लोगों के खिलाफ किया गया, जो राजनीतिक या मानवीय गतिविधियों में शामिल थे।

सैन्य अभियान और इंटरनेट बैन से बढ़ी परेशानी
HRCB के मुताबिक, ये घटनाएं ऐसे वक्त में हुईं जब बलूचिस्तान के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए गए। इसके साथ ही टेलीकम्युनिकेशन पर रोक और इंटरनेट ब्लैकआउट जैसी पाबंदियों का भी आरोप लगाया गया है। ऐसी पाबंदियों ने लोगों के लिए अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क करना और गायब हुए लोगों की जानकारी हासिल करना और मुश्किल बना दिया।
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