इजराइल खत्म हो सकता है: रूसी जनरल ने क्यों किया यह दावा; क्या ईरान जंग को और भड़काकर नेतन्याहू गलती कर रहे
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ईरान जंग शुरू हुए 6 महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है। अब तक यह जंग किसी भी नतीजे पर पहुंचते हुए नजर नहीं आ रही है। (फोटो सोर्स: Reuters)
नेशनल डेस्क। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच रूस के एक सीनियर आर्मी जनरल ने इजराइल को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा जंग अगर इसी तरह बढ़ती रही तो इजराइल एक देश के तौर पर खत्म भी हो सकता है।
रूसी सशस्त्र बलों के मेन मिलिट्री-पॉलिटिकल डिपार्टमेंट के डिप्टी चीफ और अखमत स्पेशल फोर्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अप्ती अलाउदिनोव ने रूसी सरकारी समाचार एजेंसी ‘TASS’ के साथ बातचीत में यह दावा किया।
अलाउदिनोव ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रही लड़ाई आने वाले समय में और बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, इजराइल इस संघर्ष को ज्यादा से ज्यादा फैलाना चाहता है और इसमें अमेरिका के साथ-साथ पूरे NATO गुट को शामिल करने की कोशिश कर रहा है।
अपनी ताकत को ज्यादा आंक सकता है इजराइल
अलाउदिनोव ने दावा किया कि इजराइल का मकसद जंग को इतना बड़ा करना है कि अमेरिका और NATO सीधे इसमें उतर आएं। लेकिन उनका कहना है कि यही रणनीति आखिर में इजराइल के लिए भारी पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि इजराइल अपनी ताकत का जरूरत से ज्यादा अंदाजा लगा सकता है और इसका नतीजा उसके लिए बेहद गंभीर हो सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि वह एक देश के तौर पर अपना अस्तित्व खो सकता है।
हालांकि, यह बयान रूसी सैन्य अधिकारी की राय है और इसे रूस की आधिकारिक नीति या किसी संभावित सैन्य फैसले की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
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ईरान-अमेरिका के बीच नहीं बन रही बात
अलाउदिनोव का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब मिडिल ईस्ट में इजराइल के चलते अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बातचीत करने वाली टीम से ईरान के साथ बातचीत को फिलहाल रोकने को कहा है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब तेहरान किसी समझौते के लिए तैयार हो। रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से लिखा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले ‘सकारात्मक बातचीत’ हुई थी, लेकिन ट्रंप ने फिलहाल आगे की बातचीत का इंतजार करने का फैसला किया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान की ओर से समझौते में अड़चनें आ रही हैं।
ट्रंप बोले- ईरान से अभी कोई बातचीत नहीं
इस बीच ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि फिलहाल ईरान के साथ न तो कोई बातचीत चल रही है और न ही कोई बातचीत तय है।
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह लागू है, जबकि होर्मूज स्ट्रेट खुला हुआ है और वहां जहाजों की आवाजाही चल रही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटा दिया गया है या उन्हें नष्ट कर दिया गया है।
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ईरान का क्या कहना है
ईरान की ओर से भी अमेरिकी रुख पर तीखा रिएक्शन आया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका के सीनियर अधिकारियों पर निशाना साधा।
गालिबाफ ने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीट हेगसेथ पर आरोप लगाया कि अमेरिका आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाकर ईरान से ऐसी रियायतें लेने की कोशिश कर रहा है, जो मौजूदा समझौते का हिस्सा नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका जितना दबाव बढ़ाएगा, उससे ईरान अपनी शर्तों से पीछे हटने वाला नहीं है। गालिबाफ ने अमेरिकी लीडरशिप से कहा कि वह अपने अधिकारियों के भरोसे बैठने के बजाय खुद उस स्थिति की जिम्मेदारी ले, जिसे उसने पैदा किया है।
आगे क्या होगा?
एक तरफ रूस का सीनियर सैन्य अफसर इजराइल के अस्तित्व पर सवाल उठा रहा है, दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर असमंजस बना हुआ है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को लेकर दोनों पक्षों के दावे भी तनाव को और बढ़ा रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष सीमित रहेगा या फिर इसमें अभी और बढ़ोतरी होना बाकी है। सवाल यह भी है कि क्या अब अमेरिका, ईरान और इजराइल की इस लड़ाई में दूसरे देश भी शामिल होंगे। फिलहाल एक बात साफ है, अगर टकराव और फैलता है तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। बीते 6 महीनों में यह देखा जा चुका है।

