मिनिमम बैलेंस पेनल्टी: 4 साल में बैंकों ने ग्राहकों से वसूले 26,170 करोड़ रुपए; जानिए HDFC और SBI का कलेक्शन
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बिजनेस डेस्क। बैंक बैलेंस कम होने पर लगने वाली पेनल्टी से बैंकों ने पिछले चार फाइनेंशियल ईयर FY23 से FY26 में करोड़ों रुपए कमाए हैं। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने संसद में बताया है कि बैंकों ने कस्टमर्स से पेनल्टी के तौर पर कुल 26,170 करोड़ रुपए वसूले हैं।
राज्यसभा में एक रिटन रिप्लाई के दौरान मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर फाइनेंस पंकज चौधरी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और पब्लिक सेक्टर बैंकों के डेटा शेयर किए। इन स्टैटिस्टिक्स से साफ पता चलता है कि मिनिमम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी लगाने में प्राइवेट बैंक, गवर्नमेंट बैंकों से काफी आगे हैं।

नोट: RBI ने स्पष्ट किया है कि प्राइवेट बैंकों का FY23 से पहले का डेटा मेंटेन नहीं किया जाता, जबकि FY26 के फिगर्स अभी प्रोविजनल हैं।

फाइनेंशियल ईयर 2026 में कितना कलेक्शन हुआ
फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें तो बैंकों ने मिनिमम बैलेंस पेनल्टी के जरिए 7,086.63 करोड़ रुपए कलेक्ट किए।
प्राइवेट सेक्टर बैंक: प्राइवेट बैंकों ने टोटल 4,948.71 करोड़ कलेक्शन किया, जो पब्लिक सेक्टर बैंकों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
पब्लिक सेक्टर बैंक (PSBs): गवर्नमेंट बैंकों ने 2,137.92 करोड़ कलेक्ट किए।
गवर्नमेंट बैंकों ने दी बड़ी राहत
पब्लिक सेक्टर बैंकों ने पिछले कुछ सालों में इन चार्जेस को काफी कम या खत्म किया है। देश के 12 पब्लिक सेक्टर बैंकों में से 10 बैंकों ने सेविंग अकाउंट्स पर मिनिमम बैलेंस न मेंटेन करने पर लगने वाले चार्जेस को खत्म कर दिया है। बाकी बचे 2 बैंकों ने अपनी बोर्ड पॉलिसीज और कमर्शियल रिक्वायरमेंट्स के हिसाब से इन रूल्स को काफी आसान बनाया है।
जीरो-बैलेंस अकाउंट्स
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने यह भी साफ किया कि बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स (BSBDA), जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए अकाउंट्स भी शामिल हैं, उन पर मिनिमम बैलेंस मेंटेन करने का कोई रूल लागू नहीं होता।
इन अकाउंट्स में डिपॉजिट, विड्रॉल और ATM एक्सेस जैसी बेसिक फैसिलिटी बिल्कुल फ्री मिलती हैं। फिलहाल देश में लगभग 73 करोड़ BSBDAs और जन धन अकाउंट्स चल रहे हैं, जिन्हें मिनिमम बैलेंस पेनल्टी से पूरी तरह छूट मिली हुई है।
पेनल्टी लगाने से पहले नोटिफिकेशन जरूरी
RBI के नियम के मुताबिक, बैंकों को उनके बोर्ड द्वारा अप्रूव्ड पॉलिसीज के तहत चार्जेस लगाने की इजाजत है, लेकिन यह चार्जेस रीजनेबल, ट्रांसपेरेंट और सर्विस कॉस्ट के हिसाब से होने चाहिए।
इसके अलावा, पेनल्टी लगाने से पहले बैंकों के लिए यह जरूरी है कि वे कस्टमर को SMS, ईमेल या लेटर के जरिए अलर्ट भेजें और उन्हें अकाउंट में बैलेंस रिस्टोर करने के लिए जरूरी टाइम दें।
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