परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन पर US की पाबंदी: TCS- इंफोसिस का दावा- हम पर असर कम, फिर IT प्रोफेशनल्स क्यों टेंशन में, समझें पूरा मामला
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IT कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में अपनी अमेरिकी लोकल हायरिंग बढ़ाई है और PERM पर निर्भरता कम की है। (AI जेनरेटेड सिम्बॉलिक इमेज)
बिजनेस डेस्क। अमेरिका में परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम के निलंबन को लेकर कंपनियों और कर्मचारियों की चिंता अलग-अलग है। TCS और इंफोसिस जैसी भारतीय IT कंपनियों का कहना है कि इसका उनके कारोबार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। वहीं, इन कंपनियों में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए यह मामला काफी गंभीर है। ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया रुकने से खासकर उन कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है, जिनका 6 साल का वीजा पीरियड पूरा होने वाला है।
तो आखिर एक ही फैसले को कंपनियां मामूली परेशानी और कर्मचारी इमिग्रेशन संकट क्यों मान रहे हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं...
PERM प्रोग्राम क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है
परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक अहम चरण है। इसके जरिए कंपनी यह साबित करती है कि किसी खास नौकरी के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए वह विदेशी कर्मचारी को उस पोस्ट पर बनाए रखना चाहती है।
PERM प्रोसेस आगे बढ़ने के बाद कर्मचारी के लिए ग्रीन कार्ड की राह खुलती है, लेकिन फिलहाल संबंधित कंपनियों के PERM मामलों पर रोक लगने से नए आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। पहले से चल रहे कुछ मामलों पर भी असर पड़ा है।

TCS और इंफोसिस क्यों कह रहे हैं कि असर सीमित रहेगा
इसकी सबसे बड़ी वजह है कि भारतीय IT कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए PERM आवेदन कम कर दिए है। TCS के आंकड़े इस बदलाव को साफ दिखाते हैं। कंपनी ने FY26 में सिर्फ दो PERM आवेदन दाखिल किए, जबकि 2024 में यह संख्या 1804 थी। पिछले साल अमेरिका में जारी कुल लेबर सर्टिफिकेशन में भारतीय IT कंपनियों की हिस्सेदारी 2% से भी कम रही।
अमेरिका में लोकल हायरिंग बढ़ा रही IT कंपनियां
कंपनियों के नजरिए को समझने के लिए अमेरिका में बढ़ती लोकल हायरिंग भी महत्वपूर्ण है। NASSCOM समेत इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों का कहना है कि IT कंपनियां अब अमेरिकी बाजार में स्थानीय कर्मचारियों की संख्या बढ़ा रही है।
इससे विदेशी कर्मचारियों को लंबे समय तक ग्रीन कार्ड दिलाने पर कंपनियों की निर्भरता पहले जैसी नहीं रही। टीसीएस ने भी अमेरिका में अगले पांच सालों के दौरान 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की स्थानीय स्तर पर भर्ती करने की योजना बनाई है।
कमाई पर तत्काल खतरा नहीं
ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities का भी मानना है कि इस फैसले से भारतीय IT कंपनियों की कमाई पर निकट अवधि में कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। इसकी वजह यह है कि कंपनियों का मौजूदा कारोबार अब बड़े पैमाने पर H-1B कर्मचारियों को Green Card दिलाने की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं है।
इसलिए कंपनियों के नजरिए से देखें तो PERM पर रोक एक परेशानी जरूर है, लेकिन ऐसा झटका नहीं है जिससे उनके कारोबार का मॉडल बदल जाए। यानी कंपनियां इसे ऑपरेशनल समस्या से ज्यादा एक इमिग्रेशन से जुड़ी परेशानी मान रही हैं।

कर्मचारियों के लिए क्यों बढ़ी चिंता
अब तस्वीर का दूसरा हिस्सा समझना जरूरी है। किसी कंपनी के लिए PERM प्रक्रिया रुकना शायद एक सीमित समस्या हो सकती है, लेकिन अमेरिका में रहकर काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों के लिए इसका असर काफी बड़ा हो सकता है।
PERM प्रक्रिया ग्रीन कार्ड की राह में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगर नए PERM आवेदन ही नहीं किए जा सकते, तो कर्मचारी अपनी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी प्रायोरिटी डेट हासिल नहीं कर पाएंगे।
सिर्फ नए आवेदन करने वाले कर्मचारी ही परेशान नहीं हैं। जिन लोगों की PERM प्रक्रिया पहले से चल रही है, उनके लिए भी स्थिति आसान नहीं है। जांच के दायरे में आने वाले मामलों पर आगे की प्रक्रिया रुक सकती है और कर्मचारी यह नहीं जान पाएंगे कि उनका केस कब दोबारा आगे बढ़ेगा।
इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिन्होंने ग्रीन कार्ड को ध्यान में रखकर अपनी नौकरी, परिवार और अमेरिका में भविष्य की योजना बनाई है। लंबे समय तक स्थिति साफ नहीं होने पर उनके लिए कॅरियर से जुड़े फैसले लेना भी मुश्किल हो सकता है।

सबसे बड़ी चिंता H-1B की 6 साल की सीमा को लेकर
विदेशी कर्मचारियों के लिए सबसे गंभीर मुद्दा H-1B वीजा की 6 साल की अधिकतम सीमा है। आम तौर पर H-1B वीजा पर कर्मचारी अमेरिका में अधिकतम छह साल तक रह सकता है। कुछ परिस्थितियों में इस अवधि के बाद भी वीजा बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में जरूरी कदम समय पर उठाया जाना अहम होता है।
नियमों के मुताबिक, अगर PERM या I-140 प्रक्रिया से जुड़ी जरूरी फाइलिंग कम से कम 365 दिन पहले हो चुकी है, तो कुछ कर्मचारियों को छह साल की सीमा के बाद H-1B विस्तार का रास्ता मिल सकता है। लेकिन जिन कर्मचारियों का PERM समय पर शुरू नहीं हो पाता और छह साल की सीमा नजदीक आ जाती है, उनके सामने अमेरिका छोड़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।
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